Dhaka News: बांग्लादेश ने बुधवार को पद्मा नदी पर एक विशाल बांध परियोजना को अंतिम मंजूरी दे दी है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य भारत के फरक्का बैराज के नकारात्मक प्रभावों को कम करना है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच गंगा जल बंटवारा संधि दिसंबर में खत्म हो रही है। इस प्रोजेक्ट के जरिए बांग्लादेश अपने लिए पानी सुरक्षित रखना चाहता है, जिससे जल संबंधों में नया मोड़ आएगा।
अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे प्रोजेक्ट का खर्च बांग्लादेश सरकार खुद उठाएगी। प्रधानमंत्री तारिक रहमान की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय आर्थिक परिषद की कार्यकारी समिति ने पहले चरण को पास कर दिया है। इस बड़ी परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 34,497 करोड़ टका तय की गई है। सरकार को उम्मीद है कि यह काम साल 2033 तक पूरी तरह से खत्म हो जाएगा। इससे राजशाही, ढाका और बरीसाल डिवीजन के लाखों लोगों को सीधा फायदा मिलेगा।
भारत की सहमति जरूरी नहीं: बांग्लादेश
जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी अनी ने बताया कि यह योजना बांग्लादेश के राष्ट्रीय हित का हिस्सा है। इसके लिए भारत से किसी भी तरह की चर्चा की जरूरत नहीं है। इसका मुख्य लक्ष्य अपनी सीमा के भीतर पानी सुरक्षित करना है। हालांकि, मंत्री ने यह जरूर माना कि दोनों पड़ोसी देशों की साझा नदियों का मुद्दा अलग है। गंगा नदी के जल बंटवारे पर भारत के साथ लगातार जरूरी बातचीत जारी है।
भारत ने पश्चिम बंगाल में साल 1975 के दौरान फरक्का बैराज का निर्माण किया था। इसका सबसे प्रमुख उद्देश्य गंगा नदी के पानी को मोड़कर हुगली नदी की तरफ लाना था। ऐसा इसलिए किया गया था ताकि हुगली में जमा सिल्ट या गंदगी को आसानी से साफ किया जा सके। इससे कोलकाता बंदरगाह तक बड़े जहाजों की आवाजाही को सुगम और सुरक्षित बनाया गया। भारत सरकार का तर्क है कि बैराज बंदरगाह बचाने हेतु बना था।
पड़ोसी देश के लिए क्यों संवेदनशील है यह मुद्दा?
पड़ोसी देश बांग्लादेश के लिए फरक्का का मुद्दा हमेशा से एक काफी संवेदनशील विषय रहा है। वहां के विशेषज्ञों का साफ मानना है कि सूखे के मौसम में उचित मात्रा में पानी नहीं मिलने से उन्हें भारी नुकसान होता है। कम पानी आने के कारण नदियों का जलस्तर तेजी से नीचे गिरता है, जिससे उनकी खेती बर्बाद हो रही है। वहीं समुद्र का खारा पानी नदियों के मीठे पानी में मिलकर कृषि योग्य जमीन की उपजाऊ शक्ति घटा रहा है।
दोनों देशों के बीच जल विवाद को सुलझाने के लिए अतीत में कई अहम समझौते किए गए हैं। इनमें साल 1996 में हुई ऐतिहासिक गंगा जल संधि सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसी संधि के तहत दोनों देश दशकों से आपसी बातचीत और सहयोग के जरिए पानी की गंभीर समस्या का ठोस समाधान निकालते आ रहे हैं। इस साल दिसंबर में इस संधि की मियाद पूरी होने वाली है, इसलिए नए बांध को रणनीतिक कदम माना गया है।

