महंगाई का डबल अटैक: अप्रैल में थोक महंगाई दर ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, क्या आपकी जेब पर बढ़ेगा बोझ?

National News: देश में थोक महंगाई की रफ्तार ने आम आदमी और सरकार की चिंताएं बढ़ा दी हैं। अप्रैल 2026 के दौरान थोक महंगाई दर (WPI) छलांग लगाकर 8.3 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई। पिछले महीने मार्च में यह दर महज 3.88 प्रतिशत दर्ज की गई थी। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने बुधवार को ये चौंकाने वाले आंकड़े जारी किए। आंकड़ों के मुताबिक ईंधन, कच्चे तेल और धातुओं की बढ़ती कीमतों ने महंगाई को इस ऊंचाई पर पहुंचाया है।

ईंधन और ऊर्जा क्षेत्र में मची भारी तबाही

सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि अप्रैल में थोक मूल्य सूचकांक बढ़कर 167 के स्तर पर आ गया। महीने-दर-महीने के आधार पर थोक महंगाई में 3.86 प्रतिशत की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज हुई। सबसे ज्यादा मार ‘फ्यूल एंड पावर’ सेक्टर पर पड़ी है। इस श्रेणी में महंगाई दर 24.71 प्रतिशत रही, जो मार्च में केवल 1.05 प्रतिशत थी। अकेले खनिज तेल की कीमतों में करीब 29.37 प्रतिशत का भारी उछाल आया, जिससे परिवहन और उत्पादन लागत काफी बढ़ गई।

पेट्रोल और डीजल की कीमतों ने लगाई आग

ईंधन क्षेत्र में पेट्रोल की सालाना महंगाई दर 32.4 प्रतिशत और डीजल की 25.19 प्रतिशत दर्ज की गई। कच्चे पेट्रोलियम की महंगाई तो 88.06 प्रतिशत के खतरनाक स्तर तक जा पहुंची है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के बढ़ते दाम और भू-राजनीतिक तनाव ने घरेलू बाजार पर भारी दबाव डाला है। वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों की लागत और उत्पादों की अंतिम कीमतों पर पड़ा है।

प्राथमिक वस्तुओं और मैन्युफैक्चरिंग पर दबाव

महंगाई का असर प्राथमिक वस्तुओं (Primary Articles) पर भी दिखा और इनकी दर 9.17 प्रतिशत हो गई। कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की कीमतों में महीने-दर-महीने 16.42 प्रतिशत का इजाफा हुआ। विनिर्माण क्षेत्र (Manufacturing) भी इससे अछूता नहीं रहा और यहां महंगाई 4.62 प्रतिशत तक पहुंच गई। बेसिक मेटल्स, टेक्सटाइल और केमिकल्स जैसे प्रमुख क्षेत्रों में कीमतों में वृद्धि हुई है। WPI के दायरे में आने वाले 22 विनिर्माण समूहों में से 21 समूहों में कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई है।

खाद्य महंगाई ने दी थोड़ी राहत

महंगाई के इस दौर में खाद्य वस्तुओं की कीमतें अपेक्षाकृत नियंत्रण में रहीं। WPI फूड इंडेक्स अप्रैल में बढ़कर 2.31 प्रतिशत रहा, जो पिछले महीने 1.85 प्रतिशत था। सब्जियों की महंगाई दर में गिरावट आई और यह 0.53 प्रतिशत दर्ज की गई। दूध की महंगाई 2.56 प्रतिशत और मांस-मछली श्रेणी में दर 6.68 प्रतिशत रही। हालांकि खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़े हैं, लेकिन ईंधन और ऊर्जा क्षेत्र के मुकाबले यह बढ़ोतरी काफी कम है। सरकार अब कीमतों को नियंत्रित करने के लिए नए उपायों पर विचार कर रही है।

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