Delhi News: भारत सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्र ने बुधवार को तत्काल प्रभाव से चीनी के निर्यात पर सितंबर 2026 तक पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। सरकारी अधिसूचना के अनुसार, यह रोक 30 सितंबर 2026 या अगले आदेश तक जारी रहेगी। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है। इस फैसले का असर न केवल घरेलू कीमतों पर बल्कि वैश्विक बाजार और शुगर सेक्टर के शेयरों पर भी पड़ना तय है।
वैश्विक बाजार में उछली कीमतें और ट्रेडिंग का गणित
भारत के इस कड़े फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्ची और सफेद चीनी की कीमतों में अचानक तेजी आई है। न्यूयॉर्क रॉ शुगर फ्यूचर्स में 2 फीसदी से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई। वहीं, लंदन व्हाइट शुगर फ्यूचर्स भी करीब 3 फीसदी तक उछल गया। वैश्विक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पीछे हटने से ब्राजील और थाईलैंड जैसे देशों का दबदबा बढ़ेगा। उन्हें अब एशियाई और अफ्रीकी देशों के बाजारों में निर्यात के बड़े अवसर मिलेंगे।
उत्पादन घटने की आशंका और अल-नीनो का बढ़ा खतरा
सरकार ने पहले चीनी मिलों को 15.9 लाख मीट्रिक टन निर्यात की छूट दी थी। तब अनुमान था कि उत्पादन घरेलू मांग से कहीं अधिक होगा। लेकिन अब स्थिति उलट गई है और लगातार दूसरे साल उत्पादन में कमी की आशंका है। गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में कमजोर पैदावार ने चिंता बढ़ा दी है। मौसम विज्ञानियों ने अल-नीनो के कारण मानसून प्रभावित होने की चेतावनी दी है। यदि मानसून कमजोर रहा, तो अगले सीजन में गन्ने की फसल और भी कम हो सकती है।
शुगर सेक्टर के इन दिग्गज शेयरों पर रहेगी निवेशकों की नजर
केंद्र के इस फैसले से चीनी कंपनियों के शेयरों में बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है। निवेशकों की नजर अब बलरामपुर चीनी (CMP: 548.90), त्रिवेणी इंजीनियरिंग (CMP: 388.20) और श्री रेणुका शुगर (CMP: 24.86) जैसे शेयरों पर है। इसके अलावा बजाज हिंदुस्तान, डालमिया भारत और एम.वी.के. एग्रो के शेयरों में भी उतार-चढ़ाव की संभावना है। ट्रेडिंग हाउसों के लिए अब उन ऑर्डर्स को पूरा करना मुश्किल होगा, जिनके कॉन्ट्रैक्ट प्रतिबंध से पहले ही साइन हो चुके थे।
शिपमेंट्स को मिलने वाली विशेष राहत और व्यापारियों की चिंता
सरकार ने व्यापारियों को कुछ राहत भी दी है। यदि अधिसूचना जारी होने से पहले जहाज बंदरगाह पर पहुंच चुका था या लोडिंग शुरू हो गई थी, तो निर्यात की अनुमति मिलेगी। जिन शिपमेंट्स का बिल फाइल हो चुका है, उन्हें भी नहीं रोका जाएगा। ट्रेडर्स के मुताबिक, मंजूर किए गए 15.9 लाख मीट्रिक टन में से करीब 6 लाख टन चीनी पहले ही भेजी जा चुकी है। हालांकि, अचानक आए इस बदलाव ने उन डीलर्स की मुश्किलें बढ़ा दी हैं जिन्होंने भारी-भरकम सौदे किए थे।

