Mumbai News: भारतीय मुद्रा रुपये में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बृहस्पतिवार को शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 20 पैसे टूटकर 95.86 के सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक संकट ने घरेलू मुद्रा पर भारी दबाव बनाया है। रुपये की इस कमजोरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि डॉलर की मजबूती भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।
एशिया की सबसे कमजोर मुद्रा बना रुपया
इस साल भारतीय रुपया एशियाई देशों की मुद्राओं में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली करेंसी बन गया है। साल 2026 की शुरुआत से अब तक इसमें छह प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। रुपये की इस दुर्गति के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण जिम्मेदार माने जा रहे हैं। पहला महंगा कच्चा तेल, दूसरा मजबूत होता अमेरिकी डॉलर और तीसरा पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव। इन वैश्विक कारकों ने रुपये की साख को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोर कर दिया है।
बाजार खुलते ही दिखी रुपये में बड़ी गिरावट
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में आज कारोबार की शुरुआत काफी निराशाजनक रही। रुपया डॉलर के मुकाबले 95.74 पर खुला और देखते ही देखते 95.86 के स्तर तक गिर गया। यह पिछले बंद भाव के मुकाबले 20 पैसे की बड़ी गिरावट दर्शाता है। इससे पहले बुधवार को भी रुपये ने 95.80 का रिकॉर्ड निचला स्तर छुआ था। बाजार बंद होने तक यह मामूली सुधार के साथ 95.66 पर स्थिर हुआ था। मुद्रा बाजार में यह अस्थिरता फिलहाल जारी रहने के संकेत मिल रहे हैं।
डॉलर सूचकांक और कच्चे तेल की कीमतों का गणित
दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापने वाला सूचकांक 98.48 के स्तर पर बना हुआ है। हालांकि इसमें आज 0.04 प्रतिशत की मामूली गिरावट देखी गई। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 0.44 प्रतिशत बढ़कर 106.10 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। कच्चा तेल महंगा होने से भारत का आयात बिल बढ़ जाता है। इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये की वैल्यू कम हो जाती है। वैश्विक अनिश्चितता ने इस संकट को और गहरा दिया है।
शेयर बाजार में बढ़त लेकिन एफआईआई की बिकवाली जारी
रुपये की कमजोरी के बीच घरेलू शेयर बाजारों में आज शुरुआती कारोबार में हरियाली देखी गई। सेंसेक्स 424.44 अंक चढ़कर 75,033.42 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं निफ्टी भी 141.90 अंक की बढ़त के साथ 23,554.50 पर कारोबार कर रहा था। हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का भारतीय बाजार से मोहभंग होता दिख रहा है। बुधवार को विदेशी निवेशकों ने शुद्ध रूप से 4,703.15 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। पूंजी की इस निकासी ने बाजार और रुपये दोनों के लिए अनिश्चितता पैदा कर दी है।
महंगाई बढ़ने का मंडरा रहा है खतरा
रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर पर गिरने का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ने वाला है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल और इलेक्ट्रॉनिक सामान आयात करता है। रुपया कमजोर होने से इन वस्तुओं का आयात महंगा हो जाएगा। इससे आने वाले दिनों में पेट्रोल, डीजल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की कीमतों में इजाफा हो सकता है। यदि पश्चिम एशिया का संकट लंबा खिंचता है, तो रुपये में और गिरावट आ सकती है। सरकार और आरबीआई की गतिविधियों पर अब सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

