New Delhi: भारत सरकार ने सोने के आयात पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी और सेस में बड़ी बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया है, जिसका उद्देश्य विदेशी मुद्रा के बाहर जाने पर रोक लगाना है। बुधवार को विशेषज्ञों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, सरकार ने कुल कस्टम ड्यूटी (सेस सहित) को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर अब 15 प्रतिशत कर दिया है। इस फैसले के बाद घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में ऐतिहासिक तेजी देखी गई है।
कस्टम ड्यूटी और सेस का नया ढांचा
इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के गुजरात प्रेसिडेंट नैनेश पच्चीगर के मुताबिक, सरकार ने बेसिक कस्टम ड्यूटी को 5 प्रतिशत से बढ़ाकर सीधा 10 प्रतिशत कर दिया है। इसके अतिरिक्त, कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर (AIDC) को भी एक प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है। इन दोनों बदलावों के संयुक्त प्रभाव से सोने का आयात अब पहले के मुकाबले काफी महंगा हो जाएगा।
आयात में कमी और विदेशी मुद्रा की बचत
सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य सोने के आयात को नियंत्रित करना है ताकि देश से बाहर जाने वाली विदेशी मुद्रा की बचत की जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय चालू खाते के घाटे को कम करने और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है। सरकार आवश्यक आयातों को प्राथमिकता देने और व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
ज्वेलरी बाजार और बिक्री पर संभावित असर
कस्टम ड्यूटी में इस वृद्धि का सीधा असर ज्वेलरी कारोबार पर पड़ने की संभावना है। नैनेश पच्चीगर ने चेतावनी दी है कि सोने के दाम बढ़ने से ग्राहकों की संख्या में कमी आएगी, जिससे ज्वेलरी की कुल बिक्री प्रभावित हो सकती है। उन्होंने सुझाव दिया है कि सरकार को ‘गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम’ (GMS) को फिर से सक्रिय करना चाहिए, ताकि देश के भीतर जमा पुराना सोना बाजार में आए और कारीगरों को काम मिल सके।
सोने की कीमतों में आया रिकॉर्ड उछाल
आयात शुल्क बढ़ते ही सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों ने लंबी छलांग लगाई है। IBJA द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 24 कैरेट सोने का दाम 8,779 रुपये की बढ़त के साथ 1,60,411 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। इसी तरह 22 कैरेट सोने की कीमत 1,46,936 रुपये और 18 कैरेट सोने का भाव 1,20,308 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया है।
आर्थिक मजबूती के लिए सरकार की रणनीति
सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि कीमती धातुओं पर आयात शुल्क बढ़ाना एक व्यापक आर्थिक रणनीति का हिस्सा है। इसका उद्देश्य न केवल विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखना है, बल्कि दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती सुनिश्चित करना भी है। सरकार का मानना है कि इन कदमों से वैश्विक उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था अधिक सुरक्षित और स्थिर रहेगी, जिससे भविष्य में विकास की गति को बल मिलेगा।

