New Delhi: भारत सरकार ने चीनी के निर्यात को लेकर अपनी नीति में अचानक बड़ा बदलाव करते हुए इसके एक्सपोर्ट पर प्रतिबंध लगा दिया है। केंद्र सरकार द्वारा बुधवार को जारी यह आदेश तत्काल प्रभाव से पूरे देश में लागू कर दिया गया है। इस नए फैसले के तहत भारतीय व्यापारी अब अगले चार महीनों तक विदेशों में चीनी का निर्यात नहीं कर सकेंगे। हालांकि, सरकार ने रणनीतिक कारणों से अमेरिका और यूरोपीय संघ को इस पाबंदी से बाहर रखा है।
निर्यात पर रोक के कड़े नियम और अपवाद
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, चीनी को अब ‘सीमित’ श्रेणी से हटाकर ‘प्रतिबंधित’ श्रेणी में डाल दिया गया है। यह आदेश आगामी 30 सितंबर तक प्रभावी रहेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह प्रतिबंध सफेद, ब्राउन और रिफाइंड चीनी पर समान रूप से लागू होगा। हालांकि, जिन जहाजों पर चीनी पहले ही लोड हो चुकी है या जो एडवांस ऑथराइजेशन योजना के दायरे में हैं, उन्हें भेजने की अनुमति दी गई है।
अमेरिका और यूरोपीय संघ को क्यों मिली राहत?
भारत ने वैश्विक व्यापार समझौतों का सम्मान करते हुए अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) को विशेष छूट दी है। यूरोपीय संघ को CXL कोटा के तहत और अमेरिका को टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के तहत चीनी का निर्यात जारी रहेगा। इन अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के कारण इन दो क्षेत्रों के लिए भारतीय चीनी की आपूर्ति बाधित नहीं होगी। सरकार का यह कदम घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता सुनिश्चित करने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है।
एक महीने के भीतर सरकार का यू-टर्न
दिलचस्प बात यह है कि मात्र एक महीने पहले सरकार ने निर्यात पर किसी भी तरह के प्रतिबंध की संभावना को पूरी तरह खारिज कर दिया था। अप्रैल में खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने कहा था कि इस सीजन में पर्याप्त उत्पादन की उम्मीद है और निर्यात रोकने की कोई योजना नहीं है। तब सरकार ने 15 लाख टन चीनी निर्यात का लक्ष्य भी रखा था। अचानक आए इस फैसले को बाजार विशेषज्ञ घरेलू खाद्य सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम मान रहे हैं।
उत्पादन लक्ष्य और एथेनॉल मिश्रण का गणित
खाद्य मंत्रालय के पुराने अनुमानों के अनुसार, 2025-26 के मार्केटिंग सीजन में लगभग 320 से 325 लाख टन चीनी उत्पादन की उम्मीद जताई गई थी। इसमें एथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाले गन्ने का कोटा भी शामिल था। सरकार का लक्ष्य था कि एथेनॉल निर्माण के साथ-साथ चीनी की घरेलू मांग को भी पूरा किया जाए। लेकिन वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों और आंतरिक मांग को देखते हुए अब प्राथमिकताएं बदल दी गई हैं, जिससे निर्यात पर रोक लगाना आवश्यक हो गया।
चीनी उद्योग की मांगें और वर्तमान मूल्य स्थिति
चीनी उद्योग से जुड़े हितधारक और व्यापारी लंबे समय से सरकार से चीनी के न्यूनतम विक्रय मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। वर्तमान में चीनी की न्यूनतम कीमत 31 रुपये प्रति किलोग्राम तय है, जिसे बढ़ाने पर सरकार विचार कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्यात पर प्रतिबंध लगने से घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ेगी, जिससे आम उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है। हालांकि, निर्यातकों के लिए यह फैसला कुछ समय के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।

