Jewelry Stock Crash: सोने-चांदी पर बढ़ी इंपोर्ट ड्यूटी से सहमा शेयर बाजार, आभूषण कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली

New Delhi News: केंद्र सरकार द्वारा सोने और चांदी पर आयात शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने के फैसले ने शेयर बाजार में आभूषण कंपनियों के होश उड़ा दिए हैं। बुधवार को लगातार तीसरे सत्र में ज्वेलरी सेक्टर के शेयरों में भारी बिकवाली का दबाव देखा गया। निवेशकों को आशंका है कि टैक्स में इस भारी बढ़ोतरी से आने वाले समय में सोने की मांग में बड़ी गिरावट आ सकती है। इस सरकारी फैसले के बाद बीएसई (BSE) पर सूचीबद्ध लगभग सभी प्रमुख आभूषण कंपनियों के शेयरों में जोरदार गिरावट दर्ज की गई।

दिग्गज ज्वेलरी शेयरों में बड़ी गिरावट

आयात शुल्क बढ़ने की खबर से बाजार में सबसे ज्यादा असर स्काई गोल्ड एंड डायमंड्स के शेयरों पर पड़ा, जो 11.11 प्रतिशत तक टूट गए। दिग्गज कंपनी कल्याण ज्वेलर्स के शेयरों में 6 प्रतिशत और सेनको गोल्ड के शेयरों में 4.30 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके अलावा पीसी ज्वेलर 3.65 प्रतिशत, त्रिभोवंदास भीमजी जवेरी 1.74 प्रतिशत और दिग्गज कंपनी टाइटन के शेयर 1.64 प्रतिशत नीचे गिरकर बंद हुए। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि लागत बढ़ने से इन कंपनियों के मार्जिन और बिक्री पर विपरीत असर पड़ सकता है।

प्लैटिनम और अन्य वस्तुओं पर भी बढ़ा टैक्स

सरकार ने केवल सोने-चांदी ही नहीं, बल्कि प्लैटिनम पर भी कर की दरों में बदलाव किया है। प्लैटिनम पर कर अब 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 15.4 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके साथ ही सोने और चांदी के डोरे, सिक्के और अन्य संबंधित वस्तुओं पर भी टैक्स के ढांचे को पुनर्गठित किया गया है। वित्त मंत्रालय की ताजा अधिसूचना के अनुसार, 13 मई से ‘सामाजिक कल्याण अधिभार’ (SWS) और ‘कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर’ (AIDC) में भी वृद्धि प्रभावी हो गई है, जिससे कीमती धातुओं का आयात अब काफी महंगा हो गया है।

विदेशी मुद्रा बचाने के लिए सरकार का कठोर फैसला

आयात शुल्क में यह भारी वृद्धि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उस आह्वान के बाद की गई है, जिसमें उन्होंने पश्चिम एशिया संकट के बीच देश की अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने पर जोर दिया था। सरकार का मुख्य उद्देश्य विदेशी मुद्रा भंडार को बचाना और चालू खाता घाटे (CAD) को नियंत्रित करना है। प्रधानमंत्री ने नागरिकों से ईंधन के विवेकपूर्ण उपयोग, सोने की खरीद को टालने और गैर-जरूरी विदेश यात्राओं को स्थगित करने की अपील की है। सरकार के इन कड़े कदमों का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के वित्तीय बोझ को संतुलित करना है।

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