PPF Maturity Rules: 15 साल बाद पीपीएफ खाते का क्या करें? पैसे निकालने या निवेश जारी रखने पर जानें गणित

New Delhi News: पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) भारत में लंबी अवधि के निवेश और टैक्स बचत के लिए सबसे भरोसेमंद विकल्पों में से एक है। 15 साल की अनिवार्य लॉक-इन अवधि पूरी होने के बाद अक्सर निवेशकों के मन में यह उलझन रहती है कि वे अपने फंड का प्रबंधन कैसे करें। मैच्योरिटी के समय खाताधारकों के पास निवेश निकालने या उसे आगे बढ़ाने के तीन स्पष्ट विकल्प मौजूद होते हैं। इन नियमों को सही ढंग से समझकर निवेशक चक्रवृद्धि ब्याज (Compounding) का अधिकतम लाभ उठा सकते हैं और अपनी भविष्य की वित्तीय जरूरतों को सुरक्षित कर सकते हैं।

मैच्योरिटी पर पैसा निकालने और खाता बंद करने का विकल्प

PPF का पहला विकल्प यह है कि 15 साल की अवधि पूरी होते ही आप अपना पूरा मैच्योरिटी अमाउंट (मूलधन और ब्याज) निकालकर खाता बंद कर दें। इस विकल्प के तहत प्राप्त होने वाली पूरी राशि पूरी तरह से टैक्स-फ्री होती है, क्योंकि पीपीएफ ‘EEE’ (Exempt-Exempt-Exempt) श्रेणी में आता है। यदि आपको बच्चों की शिक्षा, विवाह या संपत्ति खरीदने जैसे बड़े लक्ष्यों के लिए तुरंत बड़ी धनराशि की आवश्यकता है, तो यह सबसे उपयुक्त विकल्प है। इसके बाद खाता बंद हो जाता है और आप चाहें तो नया खाता खोल सकते हैं।

बिना नए निवेश के 5 साल का विस्तार

यदि आपको मैच्योरिटी पर पैसों की तुरंत आवश्यकता नहीं है, तो आप बिना कोई नया पैसा जमा किए अपने पीपीएफ खाते को 5-5 साल के ब्लॉक में आगे बढ़ा सकते हैं। इस विकल्प की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि आपको इसमें फ्रेश निवेश करने की जरूरत नहीं होती, फिर भी आपके मौजूदा बैलेंस पर सरकार द्वारा घोषित ब्याज दर के अनुसार ब्याज मिलता रहता है। इस दौरान आप साल में एक बार अपनी जरूरत के हिसाब से पैसे निकाल भी सकते हैं। इसके लिए किसी विशेष फॉर्म की आवश्यकता नहीं होती और यह डिफॉल्ट रूप से सक्रिय रहता है।

नए निवेश के साथ विस्तार और फॉर्म-एच का महत्व

तीसरा और सबसे लाभकारी विकल्प यह है कि आप नए निवेश (Fresh Deposits) के साथ खाते को अगले 5 साल के लिए बढ़ाएं। यह उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो रिटायरमेंट की योजना बना रहे हैं। इसके लिए मैच्योरिटी के एक साल के भीतर ‘फॉर्म-एच’ (Form H) जमा करना अनिवार्य है। ऐसा करने पर आपको पुराने बैलेंस के साथ-साथ नए निवेश पर भी ब्याज मिलता है और धारा 80C के तहत टैक्स छूट भी जारी रहती है। यदि आप फॉर्म जमा किए बिना निवेश करते हैं, तो उस नई राशि पर न तो ब्याज मिलेगा और न ही टैक्स में कोई लाभ प्राप्त होगा।

कंपाउंडिंग का जादू और निकासी के नियम

वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि पीपीएफ का वास्तविक लाभ 15 साल के बाद ही स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। जब बड़ा बेस अमाउंट अगले 5 या 10 वर्षों के लिए कंपाउंड होता है, तो मिलने वाला सालाना ब्याज आपके द्वारा किए गए नए निवेश से भी अधिक हो सकता है। निकासी के नियमों की बात करें तो, निवेश के साथ विस्तार करने पर आप 5 साल के ब्लॉक के दौरान कुल बैलेंस का अधिकतम 60% पैसा निकाल सकते हैं। वहीं, बिना निवेश वाले विकल्प में निकासी की कोई ऊपरी सीमा नहीं है, बशर्ते साल में केवल एक बार ही पैसा निकाला जाए।

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