हिमाचल पंचायत चुनाव में बड़ा धमाका: क्या सरकारी जमीन पर कब्जे के आरोप में रमीला देवी होंगी चुनाव से बाहर?

Himachal Pradesh News: कुल्लू जिले की ग्राम पंचायत कराणा-1 में पंचायत चुनाव से पहले एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जईग्राम वार्ड नंबर 1 से सदस्य पद की प्रत्याशी रमीला देवी पर सरकारी और वन भूमि पर अवैध कब्जे का गंभीर आरोप लगा है। स्थानीय निवासी सुरजीत ने निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखकर मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। इस शिकायत ने चुनावी माहौल में हलचल पैदा कर दी है और प्रत्याशी की पात्रता पर अब कानूनी तलवार लटक रही है।

शिकायतकर्ता सुरजीत का दावा है कि प्रत्याशी और उनके पति ने नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए वन विभाग की जमीन पर अतिक्रमण किया है। हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम के तहत सरकारी भूमि पर कब्जा करने वाला व्यक्ति या उसके परिवार का सदस्य चुनाव लड़ने के अयोग्य होता है। इसी प्रावधान का हवाला देते हुए सुरजीत ने राजस्व और वन विभाग के रिकॉर्ड खंगालने का आग्रह किया है। प्रशासन अब इस संवेदनशील मामले की बारीकी से जांच करने की तैयारी में जुटा हुआ है।

चुनावी शुचिता और पंचायती राज अधिनियम के कड़े प्रावधान

निर्वाचन नियमों के अनुसार, ग्राम पंचायत के उम्मीदवारों को अपनी संपत्ति और पृष्ठभूमि का सही विवरण देना अनिवार्य होता है। यदि जांच में अतिक्रमण की पुष्टि होती है, तो रमीला देवी का नामांकन रद्द हो सकता है। यह मामला आनी तहसील के ग्रामीण क्षेत्रों में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि लोग स्वच्छ छवि वाले प्रतिनिधियों की मांग कर रहे हैं। प्रशासन के निर्णय पर ही अब जईग्राम वार्ड के चुनाव का भविष्य टिका हुआ है, जो जल्द ही संबंधित अधिकारियों द्वारा तय किया जाएगा।

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, ऐसे अतिक्रमण के मामले अक्सर चुनाव के समय सामने आते हैं, जिससे राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल जाते हैं। शिकायतकर्ता ने अपनी लिखित शिकायत में मोबाइल नंबर और पूरा पता साझा करते हुए त्वरित कार्रवाई की अपील की है। अब सबकी नजरें सहायक रिटर्निंग ऑफिसर की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो संबंधित विभाग से मिली जानकारी के आधार पर अंतिम फैसला लेंगे। इस घटनाक्रम ने लोकतंत्र की शुचिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है, जिसका गहरा असर कुल्लू जिले में दिख रहा है।

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