पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत में ईंधन का क्या होगा? मोदी सरकार ने दिया बड़ा भरोसा

New Delhi News: पश्चिम एशिया में गहराते संकट के बीच भारत सरकार ने देशवासियों को बड़ी राहत दी है। केंद्र ने स्पष्ट किया है कि भारत के पास कच्चे तेल और गैस का पर्याप्त भंडार मौजूद है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में ईंधन आपूर्ति और ऊर्जा सुरक्षा की समीक्षा की गई। सरकार ने जनता से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और पेट्रोल पंपों पर अनावश्यक भीड़ न लगाएं।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सरकार ने महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए हैं। देश के पास वर्तमान में 60 दिनों का कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस का भंडार सुरक्षित है। इसके अलावा, एलपीजी का स्टॉक भी 45 दिनों के लिए पर्याप्त है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी उछाल के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रखे गए हैं। तेल कंपनियां इस दौरान प्रतिदिन करीब 1,000 करोड़ रुपये का घाटा सह रही हैं।

ईंधन बचाने के लिए पीएम मोदी का मास्टर प्लान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ईंधन संरक्षण की दिशा में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया है। उन्होंने नागरिकों को सार्वजनिक परिवहन और मेट्रो का अधिकतम उपयोग करने की सलाह दी है। इसके साथ ही ऑफिस जाने वालों के लिए कार पूलिंग को एक बेहतर विकल्प बताया गया है। सरकार ने अनावश्यक विदेश यात्राओं को कम करने और घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने की अपील की है, जिससे बहुमूल्य विदेशी मुद्रा की बचत हो सके।

कृषि क्षेत्र के लिए भी सरकार ने नई गाइडलाइन्स जारी की हैं। किसानों से रासायनिक खादों का प्रयोग 50 प्रतिशत तक कम करने और प्राकृतिक खेती अपनाने का आग्रह किया गया है। सिंचाई के लिए सोलर पंपों को प्राथमिकता दी जा रही है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और निर्बाध ऊर्जा आपूर्ति सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए रणनीतिक तेल भंडार की भी लगातार समीक्षा की जा रही है।

खाद और उद्योगों के लिए बड़ी राहत की घोषणा

औद्योगिक क्षेत्र को सहारा देने के लिए सरकार ने 2.55 लाख करोड़ रुपये की इमरजेंसी क्रेडिट योजना को मंजूरी दी है। इससे एमएसएमई सेक्टर को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। खाद की उपलब्धता को लेकर भी सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। 11 मई 2026 तक देश में 199.65 लाख टन उर्वरक उपलब्ध है। यह पिछले साल की तुलना में काफी अधिक है। खरीफ सीजन के लिए जरूरी खाद का आधा हिस्सा पहले ही स्टॉक में है।

रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि ईंधन की बचत केवल वर्तमान की जरूरत नहीं है। यह भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक जिम्मेदार संस्कृति विकसित करने का प्रयास है। यदि वैश्विक संकट लंबा खींचता है, तो भारत की तैयारी उसे मजबूती से खड़ा रखेगी। देश के पास 703 अरब डॉलर का विशाल विदेशी मुद्रा भंडार है। दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल रिफाइनर होने के नाते भारत अपनी जरूरतों को पूरा करने में पूरी तरह सक्षम है।

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