क्या खत्म होने वाला है क्षेत्रीय दलों का वजूद? बीजेपी के ‘एक राष्ट्र’ मिशन ने उड़ाई विपक्ष की नींद

New Delhi News: भारतीय जनता पार्टी ने साल 2014 में कांग्रेस मुक्त भारत का नारा दिया था। अब बीजेपी का यह अभियान क्षेत्रीय दलों के लिए बड़ा खतरा बन गया है। पार्टी लगातार क्षेत्रीय ताकतों के प्रभाव को काफी कम कर रही है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को मिली करारी हार इसका स्पष्ट संकेत है। बीजेपी अब क्षेत्रीय दलों के वर्चस्व को खत्म करने के मिशन पर काम कर रही है। इससे कई राज्यों में सत्ता के राजनीतिक समीकरण पूरी तरह से बदल रहे हैं।

दक्षिण भारत में भी बदल रही है राजनीति

तमिलनाडु की राजनीति में भी बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। विधानसभा चुनाव में द्रविड़ियन विचारधारा वाली प्रमुख पार्टियों डीएमके और एआईडीएमके को भारी नुकसान हुआ है। अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके ने शानदार सफलता हासिल की है। चुनाव में बहुमत न मिलने के बावजूद उन्होंने वामपंथी दलों और कांग्रेस के समर्थन से सरकार बना ली है। विजय अब राज्य के नए मुख्यमंत्री बन गए हैं। पारंपरिक क्षेत्रीय दलों का कमजोर होना एक बड़ा राजनीतिक बदलाव है।

बिहार और महाराष्ट्र में टूटते गठबंधन

बिहार में आरजेडी और तेलंगाना में बीआरएस काफी कमजोर हुए हैं। जेडीयू भी अब अपनी पुरानी मजबूत स्थिति में नहीं है और वह बीजेपी पर निर्भर है। महाराष्ट्र में बीजेपी ने शिवसेना और एनसीपी को दो हिस्सों में बांट दिया है। अब ये दोनों विभाजित दल अपने बड़े सहयोगी पर ही टिके हैं। इसके अलावा ओडिशा में बीजेडी अपनी साख बचाने के लिए लगातार संघर्ष कर रही है। इन राज्यों में क्षेत्रीय ताकतों का प्रभाव काफी तेजी से घट रहा है।

यूपी और पंजाब में विपक्ष की चुनौतियां

उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी का जनाधार लगभग खत्म हो चुका है। समाजवादी पार्टी को हालिया चुनावों में फायदा जरूर मिला है। लेकिन आगामी यूपी विधानसभा चुनावों में सपा को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। दूसरी तरफ पंजाब में आम आदमी पार्टी एक बड़े विभाजन से गुजर रही है। उसे अगले साल चुनाव में गंभीर मुश्किलें झेलनी पड़ सकती हैं। शिरोमणि अकाली दल भी लोगों के बीच अपनी लगातार गिरती लोकप्रियता को रोकने में विफल साबित हुआ है।

बीजेपी का एक राष्ट्र और संगठन पर जोर

बीजेपी अपने ‘एक राष्ट्र’ के एजेंडे को मजबूती से आगे बढ़ा रही है। पार्टी के शीर्ष नेता हमेशा विभाजनकारी क्षेत्रवाद का कड़ा विरोध करते हैं। बीजेपी नेताओं का मानना है कि क्षेत्रीय दल केवल स्थानीय हितों और परिवारवाद को बढ़ावा देते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों पर तीखा प्रहार किया है। वह जनता से अक्सर पूछते हैं कि उन्हें वंशवादी राजनीति करने वाले दल चाहिए या संगठन को महत्व देने वाली मजबूत सरकार चाहिए।

केंद्र और राज्यों के बीच बढ़ता राजनीतिक टकराव

संसद में क्षेत्रीय ताकतों और वामपंथी दलों की आवाज कमजोर हो रही है। पिछले ग्यारह वर्षों में विपक्ष ने बीजेपी का कड़ा विरोध किया है। विपक्ष ने संघीय ढांचे की रक्षा का मुद्दा मजबूती से उठाया है। वित्त आयोग, जीएसटी और केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल को लेकर राज्य केंद्र पर सवाल उठाते हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि केंद्र सरकार सत्ता का केंद्रीकरण कर रही है। दक्षिण के राज्य परिसीमन के मुद्दे पर चिंता व्यक्त कर चुके हैं।

संसद में अविश्वास प्रस्ताव और चुनाव आयोग पर तकरार

संसद के बजट सत्र में विपक्षी दलों ने अपनी एकजुटता दिखाई है। कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों ने मिलकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है। विपक्ष ने उन पर सदन में पक्षपातपूर्ण आचरण करने का गंभीर आरोप लगाया है। इसके साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी प्रस्ताव लाया गया है। विपक्ष ने दूसरी बार उन्हें हटाने की मांग की है। सरकार और विपक्ष के बीच यह तकरार काफी तेज हो गई है।

असम में भाजपा की कमान संभालेंगे हिमंता बिस्वा सरमा

राजनीति में बदलाव के बीच असम से भी बड़ी खबर सामने आई है। हिमंता बिस्वा सरमा एक बार फिर राज्य के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। रविवार सुबह हुई बैठक में उन्हें सर्वसम्मति से भाजपा विधायक दल का नेता चुना गया है। इस महत्वपूर्ण बैठक में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा पर्यवेक्षक के रूप में मौजूद रहे। उनके साथ हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी सह पर्यवेक्षक के तौर पर उपस्थित थे। यह पार्टी के लिए बड़ी उपलब्धि है।

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