ईरान पर ‘कयामत की रात’: ट्रंप का ‘ऑपरेशन फ्रीडम प्लस’ तैयार, क्या रूस और चीन बचा पाएंगे तेहरान को?

International News: मिडिल ईस्ट में एक बार फिर महायुद्ध की आहट तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बहुचर्चित ‘ऑपरेशन फ्रीडम प्लस’ अब ईरान के मुहाने पर आकर खड़ा है। पेंटागन ने अरब सागर में अपने 29 युद्धपोत और हाइटेक बॉम्बर्स को तैनात कर सभी लक्ष्यों को लॉक कर दिया है। अमेरिका ने तेहरान को अंतिम चेतावनी देते हुए 450 किलो यूरेनियम और होर्मुज स्ट्रेट का नियंत्रण सौंपने को कहा है। अब फैसला ईरान के हाथ में है कि उसे शांति की मेज चाहिए या फिर पूरी तरह विनाश।

ईरान का गुप्त प्लान: यूरेनियम शिफ्टिंग और रूस-चीन का फैक्टर

अमेरिका के संभावित हमले के डर से ईरान अपने परमाणु ठिकानों से यूरेनियम को सुरक्षित स्थानों पर भेजने की तैयारी में है। रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मुज्तबा यूरेनियम को बुशहर, इस्फहान और नतांज ठिकानों से हटाकर रूस भेज सकते हैं। इसके लिए अंजाली पोर्ट से होते हुए कैस्पियन सागर के समुद्री मार्ग से रूस के ओल्या पोर्ट तक का रास्ता चुना जा सकता है। ईरान को उम्मीद है कि रूस के पास मौजूद यूरेनियम को अमेरिका छूने की हिम्मत नहीं करेगा।

परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए चीन भी एक विकल्प

रूस के अलावा ईरान के पास दूसरा बड़ा विकल्प चीन है। तेहरान को उम्मीद है कि तेल की निरंतर सप्लाई के बदले बीजिंग उनके यूरेनियम भंडार को सुरक्षा प्रदान कर सकता है। अगर ईरान ऐसा करने में सफल रहा, तो खाड़ी देशों के समीकरण पूरी तरह बदल जाएंगे। हालांकि, ट्रंप प्रशासन पहले ही साफ कर चुका है कि यदि कूटनीति विफल रही, तो ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम प्लस’ के तहत पहले से कहीं ज्यादा घातक सैन्य कार्रवाई की जाएगी। अमेरिका अब समझौते के लिए अधिक समय देने के मूड में नहीं है।

पेंटागन की हिट लिस्ट: ईरान का एनर्जी सेक्टर सबसे बड़े निशाने पर

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ‘पेंटागन’ ने ईरान को आर्थिक रूप से पंगु बनाने के लिए एक विस्तृत ब्लूप्रिंट तैयार किया है। इस ऑपरेशन के तहत ईरान के पांच प्रमुख एनर्जी ठिकानों को सबसे पहले निशाना बनाया जाएगा। इसमें खर्ग आइलैंड प्रमुख है, जो ईरान के 90 प्रतिशत तेल निर्यात का केंद्र है। इसके अलावा असालुयेह पेट्रोकेमिकल हब, आबादान खुजेस्तान रिफाइनरी, बंदर माहशहर और बुशहर के पाइपलाइन जंक्शन पेंटागन के रडार पर हैं। इन ठिकानों की तबाही का मतलब ईरान की अर्थव्यवस्था का पूरी तरह ध्वस्त होना है।

इजराइल और मोसाद की खुफिया जानकारी से 24 घंटे में विनाश का प्लान

इजराइली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोसाद ने वाशिंगटन को उन संवेदनशील ठिकानों की सूची सौंप दी है, जिन्हें 24 घंटे के भीतर तबाह किया जा सकता है। इजराइल ने जोर दिया है कि किसी भी सैन्य कार्रवाई में ईरान के ऊर्जा ठिकानों को प्राथमिकता दी जाए। अमेरिका और इजराइल अब एक संयुक्त सैन्य अभियान की दिशा में बढ़ रहे हैं। अरब सागर में हथियारों की बड़ी खेप पहुंच चुकी है और अमेरिकी बॉम्बर्स अलर्ट पर हैं। ईरान के लिए अब मोहलत के चंद घंटे ही शेष बचे हैं।

होर्मुज की चाबी या विनाश? तेहरान के पास फैसले का अंतिम मौका

मिडिल ईस्ट में बारूदी सुनामी को रोकने का एकमात्र रास्ता अब केवल समझौता बचा है। अमेरिका की मांग स्पष्ट है कि उसे होर्मुज जलडमरूमध्य का खुला रास्ता और यूरेनियम का पूरा भंडार चाहिए। यदि ईरान इन शर्तों को नहीं मानता, तो उसे अंधेरे में डूबने के लिए तैयार रहना होगा। वैश्विक शक्तियां इस समय सांसें थामकर तेहरान के अगले कदम का इंतजार कर रही हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ईरान कूटनीति का रास्ता अपनाता है या युद्ध की आग में झुलसना स्वीकार करता है।

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