“मिशन अभी अधूरा है”: नेतन्याहू ने ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर दी खुली चेतावनी, अमेरिका से सैन्य मदद खत्म करने का बड़ा ऐलान

Israel-Iran News: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के खिलाफ चल रहे संघर्ष को लेकर एक बड़ा और कड़ा बयान दिया है। एक विशेष इंटरव्यू में उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान के साथ जंग अभी खत्म नहीं हुई है। नेतन्याहू ने संकल्प लिया कि जब तक तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को जड़ से खत्म नहीं कर दिया जाता, इजरायल चैन से नहीं बैठेगा। उन्होंने कहा कि मिशन अभी अधूरा है और लक्ष्य की प्राप्ति तक अभियान जारी रहेगा।

अमेरिकी चैनल ’60 Minutes’ को दिए इंटरव्यू में नेतन्याहू ने मेजर गैरेट से विस्तार से बात की। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान के पास अब भी खतरनाक परमाणु सामग्री और संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) मौजूद है। इजरायली पीएम के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भविष्य के किसी भी समझौते के तहत ईरान के भीतर जाकर इस सामग्री को बाहर निकालना चाहिए। उन्होंने साफ किया कि केवल वादों से ईरान को परमाणु हथियार बनाने से नहीं रोका जा सकता।

ईरान की सत्ता गिरी तो खत्म होगा हमास और हिज़्बुल्लाह

नेतन्याहू ने तेहरान के मौजूदा शासन को पूरे मिडिल ईस्ट में अस्थिरता की जड़ बताया। उन्होंने दावा किया कि यदि ईरान की सरकार गिरती है, तो उसके इशारे पर पल रहे आतंकी संगठन जैसे हिज़्बुल्लाह, हमास और हूती अपने आप खत्म हो जाएंगे। नेतन्याहू के अनुसार, ये सभी संगठन ईरान के वित्तीय और सैन्य समर्थन पर टिके हैं। तेहरान में सत्ता परिवर्तन का सीधा असर पूरे क्षेत्र की शांति और सुरक्षा पर पड़ेगा।

ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के रहस्यमयी ठिकाने पर भी नेतन्याहू ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मोजतबा मुमकिन है कि किसी गुप्त बंकर या अज्ञात स्थान पर छिपे हुए हों। इजरायली प्रधानमंत्री ने ईरान की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि तेहरान वास्तव में लेबनान में कभी शांति नहीं चाहता। वह केवल लेबनान का इस्तेमाल हिज़्बुल्लाह के जरिए अस्थिरता फैलाने और इजरायल को धमकाने के लिए करना चाहता है।

सैन्य आत्मनिर्भरता: अमेरिका से मदद लेने पर लिया ऐतिहासिक फैसला

इंटरव्यू का सबसे चौंकाने वाला खुलासा इजरायल और अमेरिका के रक्षा संबंधों को लेकर था। नेतन्याहू ने घोषणा की कि अब समय आ गया है कि इजरायल अमेरिकी सैन्य सहायता पर अपनी निर्भरता खत्म करे। वह सालाना मिलने वाली 3.8 अरब डॉलर की सैन्य मदद से इजरायल को मुक्त करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वह इस बदलाव को तुरंत लागू करने के पक्ष में हैं, जिससे उनके अपने अधिकारी भी हैरान रह गए।

नेतन्याहू के अनुसार, 7 अक्टूबर के बर्बर हमलों के बाद इजरायल ने अपनी रक्षा रणनीति पूरी तरह बदल दी है। अब इजरायल अपनी सुरक्षा के लिए किसी और देश या बाहरी सहायता के भरोसे नहीं रहना चाहता। उन्होंने इसे लंबी अवधि की राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता की रणनीति का हिस्सा बताया। अब इजरायल की कोशिश है कि वह अपनी सैन्य जरूरतों के लिए खुद ही पर्याप्त संसाधन और हथियार विकसित करने की दिशा में आगे बढ़े।

“मिडिल ईस्ट की तस्वीर बदल देंगे”: नेतन्याहू का कड़ा रुख

अपने राजनीतिक सफर पर बात करते हुए नेतन्याहू ने कहा कि वह पहले एक संयमित नेता थे। हालांकि, अब वह एक युद्धकालीन प्रधानमंत्री की भूमिका निभा रहे हैं। उनका लक्ष्य अब केवल संघर्ष जीतना नहीं, बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट के हालातों को इजरायल के पक्ष में बदलना है। उन्होंने 7 अक्टूबर की घटना को ईरान द्वारा रचे गए एक खतरनाक षड्यंत्र का हिस्सा बताया, जिसका उद्देश्य इजरायल का अस्तित्व मिटाना था।

अंत में नेतन्याहू ने यहूदी इतिहास और राष्ट्र की रक्षा का दृढ़ संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि दुश्मन यह न सोचे कि वह दुनिया के एकमात्र यहूदी राष्ट्र को मिटा पाएगा। उनके मुताबिक, 3,500 साल पुराने यहूदी इतिहास को खत्म करने की कोई भी कोशिश सफल नहीं होगी। नेतन्याहू ने भरोसा जताया कि उनके नेतृत्व में इजरायल न केवल सुरक्षित रहेगा, बल्कि भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए पहले से अधिक मजबूत बनेगा।

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