Stock Market Crash: सेंसेक्स 1000 अंक टूटा, निवेशकों के 4 लाख करोड़ डूबे; क्या ट्रंप के एक बयान ने बिगाड़ा दलाल स्ट्रीट का खेल?

Mumbai News: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को हाहाकार मच गया। दलाल स्ट्रीट पर कारोबार शुरू होते ही बिकवाली का भारी दबाव देखा गया। वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण सेंसेक्स 1000 अंक से ज्यादा नीचे गिर गया। इस भारी गिरावट से शुरुआती सत्र में ही निवेशकों के लगभग 4 लाख करोड़ रुपये डूब गए। बाजार के प्रमुख सूचकांक लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं, जिससे निवेशकों में घबराहट का माहौल है।

सेंसेक्स सुबह 9 बजकर 54 मिनट पर 1.37 फीसदी की गिरावट के साथ 76,269.42 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था। बाजार में इस बिकवाली के कारण बीएसई का कुल मार्केट कैप तेजी से कम हुआ। निफ्टी 50 में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। जानकारों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने बाजार की धारणा को पूरी तरह बिगाड़ दिया है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने महंगाई की चिंता बढ़ा दी है।

US-ईरान तनाव और ट्रंप का सख्त रुख

शेयर बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का विफल होना है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को ‘अस्वीकार्य’ बताकर खारिज कर दिया है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ईरान की सैन्य क्षमताओं और यूरेनियम भंडार पर नियंत्रण के लिए प्रतिबद्ध है। इस बयान के बाद तेहरान और वॉशिंगटन के बीच सैन्य टकराव की आशंका बढ़ गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका अब ईरान के खिलाफ अधिक आक्रामक रुख अपना सकता है।

ट्रंप के इस कड़े फैसले का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा। ब्रेंट क्रूड ऑयल के दाम 3.5 फीसदी बढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गए हैं। तेल की कीमतों में यह उछाल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है। कच्चे तेल के महंगा होने से राजकोषीय घाटा बढ़ने और महंगाई दर में इजाफा होने की संभावना बढ़ जाती है।

गोल्ड शेयर्स में भारी गिरावट का कारण

आज बाजार में ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में भी भारी गिरावट देखी गई। टाइटन और सेंको गोल्ड जैसी कंपनियों के शेयर 9 फीसदी तक टूट गए। यह गिरावट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस हालिया सुझाव के बाद आई है, जिसमें उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सोने की खरीद कम करने की सलाह दी थी। प्रधानमंत्री ने लोगों से विदेश यात्रा टालने की भी अपील की थी। इस बयान ने ज्वेलरी सेक्टर के निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान में कई वैश्विक और घरेलू कारक एक साथ काम कर रहे हैं। एक तरफ भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है, तो दूसरी तरफ घरेलू स्तर पर नीतिगत बयानों ने सेक्टर विशेष पर दबाव बनाया है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे फिलहाल बाजार में भारी अस्थिरता को देखते हुए सावधानी बरतें। अगले कुछ दिनों तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की गतिविधियों पर भी बाजार की चाल निर्भर करेगी।

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