Himachal News: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में पंचायत चुनावों की सरगर्मी के बीच एक अनोखा चुनावी दंगल देखने को मिल रहा है। सुंदरनगर उपमंडल की महादेव पंचायत में इस बार राजनीति ने पारिवारिक रिश्तों के बीच एक गहरी लकीर खींच दी है। कल तक जो भाई प्रधान और उपप्रधान बनकर पंचायत की सरकार चला रहे थे, आज वही भाई प्रधान की एक ही कुर्सी के लिए एक-दूसरे के कट्टर प्रतिद्वंद्वी बन गए हैं। इस रोचक मुकाबले ने पूरे क्षेत्र का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
भाई बनाम भाई: कल के साथी, आज के प्रतिद्वंद्वी
महादेव पंचायत में प्रधान पद के लिए कुल आठ प्रत्याशी चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। हालांकि, मुख्य मुकाबला पूर्व प्रधान नीलकमल और उनके चचेरे भाई व पूर्व उपप्रधान दुनी चंद के बीच माना जा रहा है। पिछले पांच सालों तक इन दोनों भाइयों ने कंधे से कंधा मिलाकर पंचायत के विकास कार्यों को आगे बढ़ाया था। लेकिन अब महत्वाकांक्षा और सत्ता की जंग ने उन्हें एक-दूसरे के खिलाफ चुनावी मैदान में ताल ठोंकने पर मजबूर कर दिया है।
20 मीटर की दूरी और राजनीतिक विचारधारा का टकराव
हैरानी की बात यह है कि इन दोनों भाइयों के घर एक-दूसरे से महज 20 मीटर की दूरी पर स्थित हैं। कल तक एक ही छत के नीचे रहने वाले इस संयुक्त परिवार के बीच अब राजनीतिक दीवार खड़ी हो गई है। परिवार के कुल 42 वोटों में भी विभाजन साफ देखा जा सकता है। दुनी चंद के पक्ष में परिवार के 29 सदस्य खड़े हैं, जबकि नीलकमल के साथ 13 वोट बताए जा रहे हैं। पिछली बार जो परिवार एकजुट था, इस बार उसकी निष्ठाएं दो हिस्सों में बंट चुकी हैं।
अनुभव बनाम रसूख: जनता के बीच छिड़ी बहस
चुनावी प्रचार के दौरान दोनों भाई अपने-अपने तर्कों के साथ मतदाताओं को रिझाने में जुटे हैं। दुनी चंद अपने उपप्रधान के कार्यकाल के दौरान हासिल किए गए प्रशासनिक अनुभवों को भुना रहे हैं। वहीं, निवर्तमान प्रधान नीलकमल अपने राजनीतिक रसूख और पिछले कार्यकाल में हुई विकास की रफ्तार को मुद्दा बना रहे हैं। महादेव पंचायत के वार्ड नंबर सात में, जो इनका गृह वार्ड है, 354 मतदाताओं के फैसले पर सबकी निगाहें टिकी हैं कि वे किसे अपना नेता चुनते हैं।
महादेव पंचायत के चुनावी समीकरण और मतदाता
इस पंचायत में कुल 2534 मतदाता हैं, जिनमें महिला और पुरुष मतदाताओं की संख्या लगभग बराबर है। आंकड़ों के अनुसार, यहां 1268 महिला और 1266 पुरुष मतदाता निर्णायक भूमिका निभाएंगे। वर्तमान में क्षेत्र की चाय की दुकानों, ढाबों और खेतों में केवल इसी बात की चर्चा है कि ‘महादेव’ की जनता अपना सियासी आशीर्वाद किसे देगी? चुनावी जानकारों का मानना है कि यह मुकाबला केवल दो भाइयों के बीच नहीं, बल्कि विकास के दो अलग-अलग दृष्टिकोणों के बीच है।

