Mumbai News: भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को अनिश्चितता और उतार-चढ़ाव का माहौल हावी रहा। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और गहराते भू-राजनीतिक तनाव के कारण घरेलू सूचकांक अपनी शुरुआती बढ़त को बरकरार रखने में नाकाम रहे। शुरुआती कारोबार में तेजी दिखाने के बाद सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही लाल निशान में फिसल गए। बाजार की इस कमजोरी के पीछे विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा की जा रही निरंतर बिकवाली को मुख्य कारण माना जा रहा है, जिससे निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है।
सेंसेक्स और निफ्टी की शुरुआती बढ़त और गिरावट
कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स 75.64 अंक की बढ़त के साथ 74,614.51 पर खुला था, वहीं एनएसई निफ्टी भी 17.10 अंक चढ़कर 23,391.10 के स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि, बाजार की यह खुशी ज्यादा देर नहीं टिकी और जल्द ही मुनाफावसूली शुरू हो गई। देखते ही देखते सेंसेक्स 182.60 अंक गिरकर 74,362.19 के स्तर पर आ गया, जबकि निफ्टी 41.05 अंक फिसलकर 23,352.25 पर कारोबार करने लगा। बैंकिंग और पावर सेक्टर के शेयरों में आए दबाव ने सूचकांकों को नीचे खींचने का काम किया।
दिग्गज शेयरों का हाल और बाजार का प्रदर्शन
सेंसेक्स की शीर्ष 30 कंपनियों में से पावर ग्रिड, एनटीपीसी, बजाज फाइनेंस, एसबीआई, टाइटन और एक्सिस बैंक के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। इसके विपरीत, एशियन पेंट्स, अदाणी पोर्ट्स, टाटा स्टील और कोटक महिंद्रा बैंक जैसे शेयरों ने कुछ हद तक बाजार को संभालने की कोशिश की और हरे निशान में कारोबार किया। एशियाई बाजारों की बात करें तो दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की और चीन का शंघाई कम्पोजिट सकारात्मक रहे, लेकिन भारतीय बाजार पर घरेलू कारकों और विदेशी बिकवाली का दबाव अधिक हावी रहा।
क्रूड ऑयल का दबाव और विदेशी निवेशकों का रुख
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव लगभग 106.6 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया है, जो भारत जैसे आयात प्रधान देश के लिए चिंता का विषय है। मंगलवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शुद्ध रूप से 1,959.39 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिससे बाजार की धारणा पर नकारात्मक असर पड़ा। पिछले सत्र में भी सेंसेक्स 1.92 प्रतिशत और निफ्टी 1.83 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ बंद हुए थे। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जब तक वैश्विक तनाव कम नहीं होता, बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।

