New Delhi News: भारत सरकार द्वारा सोने और चांदी के आयात शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) में की गई भारी बढ़ोतरी ने ज्वैलरी इंडस्ट्री के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। सरकार ने आयात शुल्क को 6 फीसदी से बढ़ाकर सीधे 15 फीसदी कर दिया है, जिससे व्यापारिक संगठनों में खलबली मच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि टैक्स में इस अचानक उछाल से देश में सोने की तस्करी और अवैध ‘ग्रे मार्केट’ को जबरदस्त बढ़ावा मिल सकता है। ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वैलरी काउंसिल ने चेतावनी दी है कि इससे एक समानांतर और अनियंत्रित अर्थव्यवस्था खड़ी होने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
स्मगलिंग और अवैध कारोबार का बढ़ता जोखिम
ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वैलरी काउंसिल (GJC) के चेयरमैन राजेश रोकड़े ने इस फैसले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ड्यूटी बढ़ने के बाद अब पारदर्शी व्यापार करना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा। उनके अनुसार, जब वैध तरीके से व्यापार करने पर टैक्स का बोझ इतना अधिक होगा, तो स्मगलिंग की घटनाएं स्वाभाविक रूप से बढ़ेंगी। टैक्स के गणित को देखें तो अब प्रति 10 ग्राम सोने पर कुल टैक्स का भार लगभग ₹27,000 हो जाएगा, जो पहले करीब ₹13,500 था। यह दोगुना अंतर अवैध रास्तों से सोना लाने वालों के लिए एक बड़े मुनाफे का अवसर बन जाता है।
बाजार में री-प्राइसिंग का दौर और भविष्य की कीमतें
कोटक सिक्योरिटीज के कमोडिटी हेड अनिंद्य बनर्जी ने बाजार की स्थिति का विश्लेषण करते हुए इसे ‘मैकेनिकल री-प्राइसिंग’ करार दिया है। उनके मुताबिक, घरेलू कीमतों में आई यह तेजी सोने की मांग के कारण नहीं, बल्कि टैक्स ढांचे में हुए बदलाव का परिणाम है। हालांकि, बनर्जी का मानना है कि लंबी अवधि में सोने और चांदी का भविष्य अभी भी सकारात्मक बना हुआ है। वैश्विक स्तर पर ‘डी-डॉलराइजेशन’ और केंद्रीय बैंकों द्वारा की जा रही सोने की भारी खरीदारी के कारण अगले 12 से 18 महीनों में अंतरराष्ट्रीय कीमतें $6,000 प्रति औंस तक पहुंच सकती हैं।
विदेशी मुद्रा भंडार और रुपये को बचाने की कवायद
केंद्र सरकार ने यह कठोर कदम पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच उठाया है। दरअसल, साल 2025-26 के दौरान भारत का स्वर्ण आयात 24 फीसदी से ज्यादा बढ़कर $71.98 बिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। भारी मात्रा में हो रहे इस आयात के कारण विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ रहा था और रुपये की कीमत भी प्रभावित हो रही थी। सरकार को उम्मीद है कि गोल्ड इंपोर्ट पर लगाम लगाने से व्यापार घाटे को कम करने और डॉलर के मुकाबले गिरते रुपये को स्थिर करने में काफी मदद मिलेगी।

