New Delhi News: केला एक ऐसा बहुमुखी फल है जिसे दुनिया भर में ऊर्जा का पावरहाउस माना जाता है। हम सभी अपनी दैनिक डाइट में इसका सेवन करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि केला हमेशा ऊपर की ओर मुड़ा हुआ या टेढ़ा ही क्यों होता है? इसके पीछे कोई संयोग नहीं, बल्कि एक अद्भुत वानस्पतिक प्रक्रिया काम करती है जिसे विज्ञान की भाषा में ‘नेगेटिव जियोट्रोपिज्म’ (Negative Geotropism) कहा जाता है। यह दिलचस्प प्रक्रिया केले को अन्य फलों से अलग और विशिष्ट आकार प्रदान करती है।
क्या है ऋणात्मक गुरुत्वाकर्षण या ‘नेगेटिव जियोट्रोपिज्म’?
ज्यादातर पौधों के फल गुरुत्वाकर्षण के कारण जमीन की ओर बढ़ते हैं, लेकिन केले के साथ मामला थोड़ा अलग है। शुरुआती चरण में केले के छोटे फल जमीन की ओर ही लटकते हैं। जैसे-जैसे ये विकसित होते हैं, इनमें ‘नेगेटिव जियोट्रोपिज्म’ की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इसका अर्थ है कि फल गुरुत्वाकर्षण के विपरीत दिशा में, यानी सूरज की रोशनी की तलाश में ऊपर की ओर बढ़ने की कोशिश करता है। इसी खिंचाव के कारण केले का आकार सीधा होने के बजाय मुड़ जाता है।
केले के विकास की अनूठी रस्साकशी
केले के फल एक बड़े गुच्छे में विकसित होते हैं, जिसे तकनीकी रूप से ‘हैंड’ कहा जाता है। विकास के दौरान फल के भीतर मौजूद हार्मोन उसे प्रकाश की ओर मुड़ने के लिए प्रेरित करते हैं। इस प्रक्रिया में एक तरफ गुरुत्वाकर्षण बल उसे नीचे की ओर खींचता है, तो दूसरी तरफ सूर्य की रोशनी उसे ऊपर की ओर आकर्षित करती है। बल के इस संघर्ष और रस्साकशी के बीच में केला बीच से मुड़कर एक खास कर्व या टेढ़ा आकार ले लेता है।
ऑक्सिन हार्मोन की भूमिका और असमान विकास
पौधों के विकास में ‘ऑक्सिन’ (Auxin) नामक हार्मोन की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। केले में इस हार्मोन का वितरण असमान होता है। जब सूर्य की रोशनी केले के एक हिस्से पर पड़ती है, तो ऑक्सिन हार्मोन फल के छाया वाले हिस्से में जमा हो जाता है। इसके कारण छाया वाला हिस्सा धूप वाले हिस्से की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ता है। विकास की इस अलग-अलग गति के कारण ही फल सीधा रहने के बजाय प्राकृतिक रूप से मुड़ जाता है।
केले के टेढ़ेपन का मुख्य निष्कर्ष
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो केले का टेढ़ापन उसके उत्तरजीविता (Survival) का एक तरीका है। वर्षावनों के बीच उगने वाले केले के पौधों को पर्याप्त रोशनी की आवश्यकता होती है, जिसके लिए फल को ऊपर की ओर मुड़ना पड़ता है। यही कारण है कि दुनिया भर में मिलने वाली केले की अधिकांश प्रजातियां टेढ़ी ही होती हैं। यह प्रकृति की एक बेहतरीन इंजीनियरिंग का उदाहरण है, जो पौधों को विपरीत परिस्थितियों में भी बढ़ने और विकसित होने में मदद करती है।

