PCOS New Name: पीसीओएस को मिला नया नाम पीएमओएस, जानिए द लैंसेट की रिपोर्ट और इसके कारण

New Delhi News: दुनियाभर की महिलाओं को प्रभावित करने वाली आम स्वास्थ्य समस्या पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) का नाम अब बदल दिया गया है। विश्वभर के चिकित्सा विशेषज्ञों ने सर्वसम्मति से इसे पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम (PMOS) नया नाम दिया है। प्रमुख मेडिकल जर्नल ‘द लैंसेट’ में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, पुराना नाम चिकित्सकीय रूप से भ्रामक था। ऐसा इसलिए क्योंकि इस बीमारी से पीड़ित कई महिलाओं के अंडाशय में वास्तव में कोई सिस्ट नहीं होती है। नए नाम से स्थिति स्पष्ट होगी।

PCOS का नाम बदलकर PMOS क्यों रखा गया?

विशेषज्ञों का मानना है कि पुराना नाम इस बीमारी के व्यापक प्रभावों को सही ढंग से नहीं दर्शाता था। पीएमओएस नाम इस जटिल बीमारी की बहु-प्रणालीगत प्रकृति को बेहतर ढंग से स्पष्ट करता है। यह बीमारी केवल अंडाशय तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे मेटाबॉलिज्म और हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ती है। भारत सहित दुनियाभर में लाखों महिलाएं इससे पीड़ित हैं। यह समस्या मोटापे, डायबिटीज, बांझपन और मानसिक स्वास्थ्य जैसी गंभीर बीमारियों से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है।

नए नाम पीएमओएस (PMOS) का असल मतलब क्या है?

एंडोक्राइन सोसाइटी के अनुसार, इस बीमारी के नए नाम का हर शब्द इसके लक्षणों को दर्शाता है। पॉलीएंडोक्राइन का अर्थ है कई हार्मोन सिस्टम का प्रभावित होना। मेटाबॉलिक शब्द इसे इंसुलिन रेजिस्टेंस, मोटापे और डायबिटीज के खतरे से जोड़ता है। ओवेरियन का मतलब है कि यह ओव्यूलेशन, मासिक धर्म और प्रजनन क्षमता को प्रभावित करती है। सिंड्रोम का अर्थ है संबंधित स्वास्थ्य जोखिमों का समूह। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य बीमारी के सही निदान और सटीक इलाज को बढ़ावा देना है।

क्या है पीएमओएस बीमारी और इसके प्रमुख लक्षण?

पीएमओएस वास्तव में वही पुरानी मेडिकल स्थिति है जिसे हम पहले पीसीओएस कहते थे। यह मुख्य रूप से एक हार्मोनल और चयापचय संबंधी विकार है। इस बीमारी के कारण महिलाओं के शरीर में कई तरह के शारीरिक बदलाव देखने को मिलते हैं। इसके सामान्य लक्षणों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • अनियमित पीरियड्स आना।
  • एण्ड्रोजन हार्मोन का बढ़ना।
  • चेहरे पर बालों का विकास।
  • वजन कम करने में कठिनाई।
  • इंसुलिन रेजिस्टेंस और बांझपन की समस्या।

क्या नाम बदलने से बीमारी का इलाज भी बदलेगा?

मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार, नाम में बदलाव के बावजूद इस बीमारी का बुनियादी इलाज काफी हद तक पहले जैसा ही रहेगा। जीवनशैली में सुधार इस समस्या को नियंत्रित करने का सबसे प्रभावी तरीका है। इसे सही ढंग से मैनेज करने के लिए इन बातों पर ध्यान देना आवश्यक है:

  • नियमित शारीरिक व्यायाम करना।
  • संतुलित और पौष्टिक आहार लेना।
  • तनाव कम करना और पर्याप्त नींद।
  • डॉक्टर की सलाह पर हार्मोनल थेरेपी।
  • वजन प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना।

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