Global News: कैरेबियन क्रूज शिप पर नोरोवायरस के प्रकोप ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य चिंताओं को बढ़ा दिया है। फ्लोरिडा से रवाना हुए इस जहाज पर 100 से अधिक यात्री और क्रू मेंबर्स अचानक बीमार पड़ गए। विशेषज्ञों के अनुसार, बंद वातावरण जैसे क्रूज, हॉस्टल और नर्सिंग होम में यह वायरस बेहद तेजी से फैलता है। नोरोवायरस मुख्य रूप से पेट और आंतों में गंभीर सूजन पैदा करता है। इसे आमतौर पर ‘पेट का फ्लू’ भी कहा जाता है।
नोरोवायरस के प्रमुख लक्षण और शरीर पर इसका प्रभाव
नोरोवायरस के संक्रमण की पहचान इसके तीव्र लक्षणों से की जा सकती है। वायरस के संपर्क में आने के 12 से 48 घंटों के भीतर मरीज को लगातार उल्टी और जी मिचलाने की समस्या होने लगती है। इसके साथ ही दस्त, पेट में तेज मरोड़, हल्का बुखार और सिरदर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। हालांकि अधिकांश लोग दो-तीन दिनों में ठीक हो जाते हैं, लेकिन इस दौरान शरीर में पानी की भारी कमी (डिहाइड्रेशन) होने का खतरा सबसे अधिक रहता है।
संक्रमण फैलने के मुख्य कारण और जोखिम वाले कारक
यह वायरस दूषित भोजन और पानी के माध्यम से बहुत आसानी से प्रसारित होता है। यदि संक्रमित व्यक्ति भोजन को छूता है या सब्जियां दूषित पानी से धोई जाती हैं, तो संक्रमण फैल जाता है। इसके अलावा, संक्रमित सतहों जैसे दरवाजे के हैंडल या रेलिंग को छूने के बाद हाथ मुंह तक ले जाने से भी वायरस शरीर में प्रवेश करता है। संक्रमित व्यक्ति की उल्टी के बारीक कण हवा के जरिए भी दूसरों को बीमार कर सकते हैं।
बचाव के प्रभावी उपाय और स्वच्छता के कड़े नियम
नोरोवायरस से सुरक्षा के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता सबसे महत्वपूर्ण है। अपने हाथों को बार-बार साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड तक धोएं। फलों और सब्जियों का उपयोग अच्छी तरह धोने के बाद ही करें। यदि घर में कोई बीमार है, तो ब्लीच युक्त क्लीनर से सतहों को कीटाणुरहित करें। दूषित कपड़ों को गर्म पानी में धोना चाहिए। बीमार व्यक्ति को लक्षण खत्म होने के 48 घंटे बाद तक दूसरों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए।

