खाकी पर गिरी गाज: हिमाचल में ‘चिट्टा’ तस्करी में शामिल 21 पुलिसकर्मी बर्खास्त, सुक्खू सरकार का बड़ा एक्शन

Himachal News: हिमाचल प्रदेश में ‘चिट्टा’ माफिया के खिलाफ सुक्खू सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार को ऐलान किया कि नशा तस्करी में संलिप्तता के चलते 21 पुलिसकर्मियों सहित 31 सरकारी कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि खाकी हो या कोई अन्य रसूखदार पद, नशा तस्करी में शामिल किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार ने इस मामले में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है।

नारकोटिक्स समन्वय समिति की बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने बताया कि कुल 123 कर्मचारियों के खिलाफ जांच चल रही है। बर्खास्त किए गए कर्मचारियों में बिजली बोर्ड, जल शक्ति विभाग, और परिवहन निगम (HRTC) के कर्मी भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ईमानदारी और अनुशासन हमारी प्राथमिकता है। जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है। सरकार अब नशा माफिया के आर्थिक ढांचे को तोड़ने पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर रही है।

नशा तस्करी रोकने में हिमाचल देश में अव्वल

हिमाचल प्रदेश सरकार ने ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई में राष्ट्रीय स्तर पर कीर्तिमान स्थापित किया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, वर्ष 2026 में देश भर में एनडीपीएस एक्ट के तहत हुई कुल निवारक कार्रवाइयों में से एक-तिहाई अकेले हिमाचल पुलिस ने की हैं। पीआईटी-एनडीपीएस अधिनियम के तहत 174 बड़े तस्करों को हिरासत में लिया गया है। इस उपलब्धि के साथ हिमाचल वर्तमान में नशा माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करने में देश में पहले पायदान पर पहुंच गया है।

आंकड़ों की बात करें तो 2023 से अब तक एनडीपीएस अधिनियम के तहत 6,811 मामले दर्ज हुए हैं। यह पिछली सरकार के मुकाबले 33 प्रतिशत की भारी वृद्धि है। पुलिस ने अब तक 10,357 आरोपियों को गिरफ्तार किया है और करीब 45,867 किलोग्राम नशीले पदार्थ जब्त किए हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि मशोबरा में 20 मई से एक अत्याधुनिक पुनर्वास केंद्र भी शुरू होने जा रहा है। टांडा मेडिकल कॉलेज में भी जल्द ही ऐसी सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

अवैध संपत्तियों पर चलेगा सरकारी बुलडोजर

नशा तस्करों की कमर तोड़ने के लिए उनकी अवैध संपत्तियों को फ्रीज और ध्वस्त करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। पिछले साढ़े तीन सालों में लगभग 51 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है। स्पेशल टास्क फोर्स ने 700 से अधिक संदिग्ध मामलों की गहन जांच की है। अब तक 76 अवैध संपत्तियों की पहचान हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नशा माफियाओं द्वारा अतिक्रमित संपत्तियों को तुरंत ढहाने की कार्रवाई शुरू की जाए।

सरकार ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि बार-बार अपराध करने वाले अपराधियों की विस्तृत मैपिंग की जाए। वित्तीय जांच के लिए 300 विशेष मामलों का चयन किया गया है। 17 मामलों में बेदखली और ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। सुक्खू सरकार का यह कड़ा रुख उन सरकारी मुलाजिमों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो सिस्टम के भीतर रहकर माफिया की मदद करते हैं। सरकार अब पुनर्वास और सख्त पुलिसिंग के दोहरे मॉडल पर काम कर रही है।

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