शिमला के ऐतिहासिक कमला नेहरू अस्पताल की शिफ्टिंग पर हाईकोर्ट का बड़ा एक्शन: सरकार के फैसले पर लगी रोक

Himachal News: शिमला के ऐतिहासिक कमला नेहरू अस्पताल (KNH) को आईजीएमसी शिफ्ट करने की योजना पर हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। फालमा चौहान द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने शिफ्टिंग प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने सरकार के फैसले को बड़ा झटका देते हुए स्वास्थ्य विभाग से विस्तृत जवाब तलब किया है।

102 साल पुराने अस्पताल की पहचान पर संकट?

राज्य सरकार ने हाल ही में कमला नेहरू अस्पताल की गायनी ओपीडी और अन्य महत्वपूर्ण सेवाओं को इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया था। सरकार का तर्क था कि आईजीएमसी में मरीजों को अधिक उन्नत चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी। हालांकि, इस फैसले का शिमला सहित पूरे प्रदेश में कड़ा विरोध हुआ। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि 102 साल पुराना यह अस्पताल महिलाओं और बच्चों के लिए जीवनरेखा है और शिफ्टिंग से इसकी ऐतिहासिक पहचान मिट जाएगी।

हाईकोर्ट के सख्त सवाल: मरीजों को क्या होगा फायदा?

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने विभाग से स्पष्टीकरण मांगा है कि आखिर इस शिफ्टिंग का प्रस्ताव क्यों लाया गया और इससे आम मरीजों को क्या वास्तविक लाभ या हानि होगी। इसके अलावा, अदालत ने डेंटल कॉलेज के विस्तार से जुड़े प्रस्ताव पर भी फिलहाल रोक लगा दी है। याचिकाकर्ताओं के वकील ने जोर देकर कहा कि दूरदराज के इलाकों से आने वाली गर्भवती महिलाओं के लिए यह अस्पताल सबसे सुलभ केंद्र है।

शिमला में भारी विरोध और जनभावनाओं की जीत

कमला नेहरू अस्पताल की शिफ्टिंग के खिलाफ शिमला में कई दिनों से प्रदर्शन हो रहे थे। स्थानीय निवासियों, महिला संगठनों और विपक्षी दलों ने एकजुट होकर सरकार के इस कदम को जनविरोधी बताया था। महिला संगठनों ने हाईकोर्ट के स्थगन आदेश का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह फैसला महिलाओं के स्वास्थ्य अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक बड़ी जीत है। अब सरकार को अदालत में यह साबित करना होगा कि उनका फैसला जनहित में था या नहीं।

स्वास्थ्य विभाग की अगली रणनीति और सुनवाई

सूत्रों के अनुसार, हिमाचल सरकार और स्वास्थ्य विभाग अब हाईकोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रखने के लिए विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। विभाग का मानना है कि आईजीएमसी में शिफ्टिंग से जटिल प्रसव मामलों में मृत्यु दर को कम करने में मदद मिलेगी। हालांकि, जब तक अगली सुनवाई नहीं होती, शिफ्टिंग की कोई भी गतिविधि नहीं चल सकेगी। प्रदेश भर की नजरें अब इस मामले की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां अस्पताल के भविष्य का अंतिम फैसला होगा।

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