New Delhi News: भारत सरकार द्वारा सोने और चांदी पर आयात शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) को 6 फीसदी से बढ़ाकर सीधे 15 फीसदी करने के फैसले का असर निवेश बाजार पर दिखने लगा है। बुधवार को जारी सरकारी आदेश के बाद गोल्ड और सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) में 6 फीसदी तक की बड़ी बढ़त दर्ज की गई। सरकार ने यह कदम विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव को कम करने के उद्देश्य से उठाया है। शुल्क बढ़ने के कारण घरेलू बाजार में सोने का वायदा भाव 7.2 फीसदी और चांदी का वायदा भाव 8 फीसदी तक उछल गया है।
गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ में जोरदार तेजी
इंपोर्ट ड्यूटी में बढ़ोतरी के बाद भौतिक सोना महंगा होने से निवेशकों का रुझान ईटीएफ की ओर तेजी से बढ़ा है। निप्पॉन इंडिया, टाटा, एचडीएफसी और आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल जैसे प्रमुख गोल्ड ईटीएफ में 4 से 6 फीसदी की तेजी देखी गई। इसी तरह, टाटा सिल्वर ईटीएफ और निप्पॉन इंडिया सिल्वर ईटीएफ में भी 6 फीसदी तक की बढ़त दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिजिकल इंपोर्ट महंगा होने से निवेशक अब ईटीएफ को एक बेहतर और किफायती विकल्प के रूप में देख रहे हैं, जिससे फंड की एसेट वैल्यू में इजाफा हुआ है।
ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट
एक तरफ जहां ईटीएफ निवेशकों के चेहरे खिले हैं, वहीं दूसरी तरफ शेयर बाजार में ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों को तगड़ा झटका लगा है। टाइटन कंपनी, कल्याण ज्वैलर्स और थंगमायिल ज्वैलर्स जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयरों में 1.5 फीसदी से लेकर 6 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई। एनएसई पर टाइटन के शेयर 1.43 फीसदी गिरकर ट्रेड कर रहे थे, जबकि थंगमायिल ज्वेलरी के शेयरों में 5 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई। निवेशकों को डर है कि सोने की कीमतों में भारी उछाल से ज्वेलरी की मांग प्रभावित हो सकती है, जिसका सीधा असर कंपनियों के मुनाफे पर पड़ेगा।
इंपोर्ट ड्यूटी के गणित में बड़ा बदलाव
सरकार के इस फैसले से सोने और चांदी के आयात पर लगने वाले कर में प्रति किलोग्राम के हिसाब से भारी बढ़ोतरी हुई है। पहले सोने के आयात पर प्रति किलोग्राम शुल्क 8,31,230 रुपये था, जो अब बढ़कर 20,78,075 रुपये हो गया है। यानी इसमें प्रति किलो 12.46 लाख रुपये से ज्यादा की वृद्धि हुई है। वहीं चांदी के मामले में इंपोर्ट ड्यूटी 14,861 रुपये से बढ़कर 37,153 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई है। सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य अनावश्यक आयात पर लगाम लगाना और देश के चालू खाता घाटे (CAD) को नियंत्रित करना है।

