New Delhi: देश की दो सबसे बड़ी डेयरी कंपनियों, अमूल और मदर डेयरी ने आम जनता को महंगाई का एक और बड़ा झटका दिया है। दोनों कंपनियों ने बुधवार को अपने दूध के दामों में बढ़ोतरी करने की औपचारिक घोषणा कर दी है। दूध की ये नई दरें 14 मई से प्रभावी रूप से लागू हो गई हैं। इस फैसले के बाद अब उपभोक्ताओं को दूध के विभिन्न पैकेटों के लिए पहले के मुकाबले अधिक कीमत चुकानी होगी।
दो रुपये प्रति लीटर तक महंगी हुई कीमतें
ताजा जानकारी के अनुसार, दूध के लगभग सभी प्रमुख वेरिएंट और पैक पर 2 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा किया गया है। इस बढ़ोतरी का सीधा असर उन लाखों परिवारों के मासिक बजट पर पड़ेगा, जो प्रतिदिन दूध का उपयोग करते हैं। अमूल ब्रांड का संचालन करने वाले संगठन ने बताया कि यह वृद्धि लगभग 2.5 से 3.5 प्रतिशत के बीच है, जो उत्पादन की बढ़ती लागत को संतुलित करने के लिए की गई है।
इनपुट लागत में वृद्धि बनी मुख्य कारण
गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन के मुताबिक, पशु आहार, पैकेजिंग सामग्री और परिवहन के लिए इस्तेमाल होने वाले ईंधन की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। कंपनी ने स्पष्ट किया कि मई 2025 के बाद यह पहली बार है जब कीमतों में इस तरह का संशोधन किया गया है। पिछले कई महीनों से लागत को स्थिर रखने के तमाम प्रयासों के बावजूद, अंततः इनपुट कॉस्ट बढ़ने के कारण यह फैसला लेना अनिवार्य हो गया था।
मदर डेयरी की कीमतों में भी हुआ इजाफा
अमूल के नक्शेकदम पर चलते हुए मदर डेयरी ने भी अपने दूध के दाम बढ़ा दिए हैं। गौरतलब है कि इससे पहले अप्रैल 2025 में भी कंपनी ने कीमतों में सुधार किया था। एक साल के भीतर दूसरी बार हुई इस बढ़ोतरी से मध्यम वर्गीय परिवारों में काफी चिंता देखी जा रही है। विशेषकर उन घरों में जहां बच्चों और बुजुर्गों के लिए दूध का बड़े पैमाने पर दैनिक सेवन किया जाता है।
विशेषज्ञों की राय और बाजार का रुख
डेयरी उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि पशु आहार और लॉजिस्टिक्स खर्चों में हो रही बढ़ोतरी ने कंपनियों के लिए मुश्किलें पैदा कर दी हैं। उनके पास अंतिम उत्पाद की कीमत बढ़ाने के अलावा अब बहुत सीमित विकल्प ही बचे थे। वैश्विक स्तर पर खाद्य पदार्थों की कीमतों में आ रहे उतार-चढ़ाव को भी इस मूल्य वृद्धि का एक बड़ा कारण माना जा रहा है, जिससे आम उपभोक्ता पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
भविष्य की संभावनाओं पर कंपनियों का रुख
फिलहाल दोनों प्रमुख डेयरी कंपनियों ने संकेत दिए हैं कि भविष्य की कीमतें पूरी तरह से बाजार की स्थिति और आगामी लागत पर ही निर्भर करेंगी। कंपनियों का लक्ष्य है कि किसानों को सही मूल्य मिले और उपभोक्ताओं तक गुणवत्तापूर्ण उत्पाद पहुंचे। हालांकि, मौजूदा बदलावों को देखते हुए अब उपभोक्ताओं के लिए यह बेहद जरूरी हो गया है कि वे अपने घर के मासिक बजट का प्रबंधन इन नई दरों के अनुसार ही करें।

