Mumbai News: मुंबई के दो एथलीटों, श्रीयांश भंडारी और रमेश धामी ने अपनी मेहनत और नवाचार से एक ऐसी मिसाल पेश की है जो पर्यावरण और समाज दोनों के लिए वरदान साबित हो रही है। साल 2015 में शुरू हुआ उनका स्टार्टअप ‘ग्रीनसोल’ (Greensole) पुराने और बेकार फेंके गए जूतों को रिसाइकिल करके आरामदायक चप्पलें बनाता है। आज यह स्टार्टअप न केवल सालाना 3 करोड़ रुपये का टर्नओवर हासिल कर रहा है, बल्कि लाखों लोगों के जीवन में बदलाव भी ला रहा है।
कैसे आया जूतों को रिसाइकिल करने का विचार?
इस सफर की शुरुआत तब हुई जब श्रीयांश भंडारी ने अपने मैराथन कोच रमेश धामी को पुराने जूतों की मरम्मत करते हुए देखा। रमेश उन जूतों को फेंकने के बजाय उनका पुन: उपयोग करना चाहते थे क्योंकि उनका ‘सोल’ काफी मजबूत था। रिसर्च के दौरान उन्हें पता चला कि दुनिया भर में अरबों जूते लैंडफिल में फेंक दिए जाते हैं, जिन्हें नष्ट होने में 200 साल लगते हैं। इसी समस्या को सुलझाने के लिए दोनों ने मिलकर ग्रीनसोल की नींव रखी।
झुग्गी-बस्ती से शुरू हुआ चुनौतीपूर्ण सफर
शुरुआती दिनों में दोनों संस्थापकों के पास फुटवियर मैन्युफैक्चरिंग का कोई अनुभव नहीं था। उन्होंने मुंबई की एक झुग्गी बस्ती में किराए की एक छोटी सी यूनिट से काम शुरू किया, जहाँ वे दिन में केवल 15-20 जोड़ी जूते ही बना पाते थे। हालांकि, ‘राम फैशन एक्सपोर्ट्स’ के साथ साझेदारी ने उनकी किस्मत बदल दी। उन्होंने एक विशेष तकनीक विकसित की जिससे पुराने जूतों में 20% नया मटेरियल जोड़कर उन्हें पूरी तरह नया और स्वच्छ बनाया जाता है।
20 राज्यों तक पहुंचा ग्रीनसोल का नेटवर्क
वर्तमान में ग्रीनसोल हर महीने लगभग 15,000 से 20,000 जोड़ी पुराने जूते इकट्ठा करता है। इन जूतों को खोलकर बच्चों के साइज के हिसाब से ‘डाई-कटिंग’ की जाती है। स्टार्टअप की टीमें गांवों और आदिवासी क्षेत्रों में जाकर बच्चों के पैरों का माप लेती हैं ताकि उन्हें सही फिटिंग की चप्पलें प्रदान की जा सकें। 100 से अधिक कॉर्पोरेट पार्टनर्स के सहयोग से यह सामाजिक पहल आज भारत के 20 राज्यों तक अपनी पहुंच बना चुकी है।
भविष्य के लक्ष्य और वैश्विक विस्तार की योजना
चैरिटी के साथ-साथ ग्रीनसोल का एक रिटेल ब्रांड भी है जो इको-फ्रेंडली स्नीकर्स बेचकर 3 करोड़ रुपये तक की कमाई कर रहा है। यह मॉडल न केवल कचरा कम करता है बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार भी पैदा कर रहा है। श्रीयांश और रमेश अब इस मॉडल को नेपाल, भूटान और अफ्रीका जैसे देशों में ले जाने की योजना बना रहे हैं। साथ ही, वे जूतों के कचरे का इस्तेमाल रनिंग ट्रैक जैसे पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए सरकार के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं।

