NEET UG 2026 पेपर लीक विवाद के बीच चीन की ‘गाओकाओ’ चर्चा में, आखिर क्यों वहां नकल करना है नामुमकिन?

India News: भारत में नीट यूजी 2026 परीक्षा के बाद पेपर लीक के गंभीर आरोपों ने शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजस्थान पुलिस और एसओजी की जांच में प्रश्नपत्र वितरण को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। इस प्रशासनिक विफलता के बीच दुनिया की सबसे कठिन मानी जाने वाली चीन की ‘गाओकाओ’ परीक्षा की सुरक्षा प्रणाली सुर्खियों में है। चीन अपनी इस राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा को ‘राज्य रहस्य’ मानकर सैन्य स्तर की सुरक्षा प्रदान करता है, जिससे वहां लीक की गुंजाइश खत्म हो जाती है।

नीट यूजी 2026: राजस्थान में गिरफ्तारी और पेपर लीक के आरोप

नीट यूजी 2026 की परीक्षा 3 मई को देश-विदेश के विभिन्न केंद्रों पर संपन्न हुई थी। परीक्षा के फौरन बाद राजस्थान में प्रश्नपत्र लीक होने की खबरें आईं। राजस्थान विशेष अभियान समूह (एसओजी) ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए मनीष यादव और राकेश मांडवरिया नामक दो आरोपियों को दबोचा है। इन पर आरोप है कि इन्होंने परीक्षा से पहले ही कुछ चुनिंदा उम्मीदवारों को प्रश्नपत्र मुहैया कराए थे। इस घटना ने लाखों मेधावी छात्रों के भविष्य और उनकी मेहनत पर चिंता के बादल मंडरा दिए हैं।

क्या है गाओकाओ परीक्षा और क्यों है यह इतनी कठिन?

गाओकाओ चीन की राष्ट्रीय महाविद्यालय प्रवेश परीक्षा है, जो हर साल जून में आयोजित होती है। यह परीक्षा चीन के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में स्नातक स्तर पर प्रवेश पाने का एकमात्र और सबसे महत्वपूर्ण रास्ता है। 2025 के आंकड़ों के अनुसार, इसमें लगभग 1.33 करोड़ से अधिक छात्र शामिल हुए थे। चीनी शिक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित इस परीक्षा में चीनी भाषा, गणित और विदेशी भाषा अनिवार्य विषय होते हैं। इसे दुनिया की सबसे प्रतिस्पर्धी और चुनौतीपूर्ण शैक्षणिक परीक्षाओं की सूची में शीर्ष पर रखा जाता है।

सैन्य स्तर की सुरक्षा: जब परीक्षा केंद्र बन जाते हैं अभेद्य किले

चीन में गाओकाओ के दौरान सुरक्षा व्यवस्था किसी युद्धस्तर की तैयारी जैसी होती है। परीक्षा केंद्रों के आसपास निर्माण कार्यों और शोर-शराबे पर पूरी तरह पाबंदी रहती है। सुरक्षा के लिए हाई-टेक ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और भारी पुलिस बल तैनात किया जाता है। नकल रोकने के लिए फेस रिकग्निशन और मेटल डिटेक्टरों का इस्तेमाल होता है। यहां तक कि परीक्षा केंद्रों को जैमर्स की मदद से बाहरी संचार से पूरी तरह काट दिया जाता है। प्रशासन नकल करने की कोशिश को एक गंभीर आपराधिक श्रेणी में रखता है।

जेलों में छपाई और GPS ट्रैकिंग: गोपनीयता का चरम स्तर

गाओकाओ के प्रश्नपत्रों की गोपनीयता बनाए रखने के लिए चीन में बेहद सख्त प्रोटोकॉल का पालन होता है। इन प्रश्नपत्रों की छपाई विशेष रूप से नामित जेलों के भीतर की जाती है, जहां 24 घंटे कड़ी निगरानी रहती है। मुद्रण प्रक्रिया में शामिल कर्मचारियों का बाहरी दुनिया से संपर्क पूरी तरह काट दिया जाता है। छपाई के बाद, प्रश्नपत्रों को सशस्त्र पुलिस की सुरक्षा में जीपीएस ट्रैकिंग वाली गाड़ियों से परीक्षा केंद्रों तक पहुँचाया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुरक्षा का अद्भुत तालमेल देखने को मिलता है।

पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून और कड़े इंतजाम

चीन में गाओकाओ परीक्षा के दौरान गड़बड़ी करने वालों के लिए बेहद कड़े कानूनी प्रावधान हैं। प्रश्नपत्रों को ‘टॉप सीक्रेट’ की श्रेणी में रखने के कारण इनके साथ छेड़छाड़ करना देशद्रोह के समान माना जाता है। हाई-टेक सर्विलांस और सशस्त्र सुरक्षा के कारण वहां पेपर लीक होना लगभग असंभव है। भारत में नीट जैसी बड़ी परीक्षाओं में बढ़ती धांधली को देखते हुए विशेषज्ञ अक्सर गाओकाओ मॉडल को अपनाने की सलाह देते हैं। बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप और सख्त तकनीक के जरिए ही परीक्षा की शुचिता बचाई जा सकती है।

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