Washington News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापारिक नीतियों को अदालत में एक बार फिर करारी शिकस्त मिली है। गुरुवार को अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय व्यापार अदालत ने राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए 10% वैश्विक आयात शुल्क को पूरी तरह अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि प्रशासन ने 1970 के दशक के पुराने व्यापार कानून का हवाला देकर ये शुल्क लगाए थे, जो कानूनी रूप से तर्कसंगत नहीं हैं।
ट्रंप प्रशासन ने इसी साल 24 फरवरी को दुनिया भर से अमेरिका आने वाले सामानों पर 10% का नया आयात शुल्क लागू किया था। इस फैसले के खिलाफ अमेरिका के 24 राज्यों और कई छोटे व्यापारियों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि ट्रंप ने यह कदम पिछले साल सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए गए भारी टैरिफ के फैसले के असर को कम करने के लिए उठाया था।
अदालत ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला, धारा 122 के इस्तेमाल को बताया गलत
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार अदालत की पीठ ने 2-1 के बहुमत से यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि राष्ट्रपति ने 1974 के व्यापार कानून की धारा 122 का गलत इस्तेमाल किया है। इस कानून के तहत राष्ट्रपति केवल तब शुल्क लगा सकते हैं जब देश गंभीर ‘भुगतान संतुलन’ (Balance of Payments) संकट का सामना कर रहा हो या मुद्रा की कीमत में गिरावट को रोकना अनिवार्य हो।
अदालत ने सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं कि वह पांच दिनों के भीतर इस फैसले का पालन सुनिश्चित करे। साथ ही, उन सभी आयातकों को टैक्स की राशि वापस करने का आदेश दिया गया है जिन्होंने इस अवधि के दौरान शुल्क का भुगतान किया था। हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ किया कि स्टील, एल्युमीनियम और ऑटोमोबाइल सेक्टर पर लगे मौजूदा टैरिफ पर इस फैसले का कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि वे इस कानूनी चुनौती के दायरे में नहीं थे।
ट्रंप प्रशासन ने बचाव में तर्क दिया था कि अमेरिका का व्यापार घाटा 1.2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। सरकार ने चालू खाता घाटा जीडीपी का 4% होने का हवाला दिया था। इसके विपरीत, अर्थशास्त्रियों ने गवाही दी कि अमेरिका वर्तमान में किसी भुगतान संतुलन संकट से नहीं जूझ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ठोस कानूनी आधार की कमी के कारण प्रशासन को अदालत में मुंह की खानी पड़ी है।
इस अदालती फैसले ने ट्रंप प्रशासन की वैश्विक व्यापार रणनीति को समय से पहले ही गहरे संकट में डाल दिया है। ये टैरिफ वैसे भी 24 जुलाई को समाप्त होने वाले थे, लेकिन समय से पहले आए इस फैसले ने सरकार की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब अमेरिकी न्याय विभाग इस फैसले को यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स में चुनौती देने की तैयारी कर रहा है, जिससे कानूनी लड़ाई और लंबी खिंच सकती है।

