Himachal Pradesh News: मंडी नगर निगम चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया आह्वान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि सोना खरीदना भारत की लोक संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। इस पर किसी भी तरह की रोक लगाना कतई उचित नहीं है। उन्होंने स्वर्णकारों के रोजगार और सामाजिक परंपराओं का हवाला देते हुए पीएम के बयान पर सवाल उठाए और प्रदेश की आर्थिक आत्मनिर्भरता का नया खाका पेश किया।
मुख्यमंत्री सुक्खू के अनुसार, हिमाचल और देश के अन्य हिस्सों में विवाह शादियों से लेकर हर मांगलिक कार्य में सोने की खरीदारी होती है। यह केवल निवेश नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के रोजगार का जरिया भी है। आजाद भारत में नागरिकों की व्यक्तिगत पसंद पर अंकुश लगाना सही नहीं है। पीएम मोदी ने किस मकसद से जनता से ऐसा आह्वान किया है, यह वही बेहतर जानते होंगे। सरकार जनता की परंपराओं का सम्मान करती है।
खर्चों में कटौती: छोटी इलेक्ट्रिक कार में सफर और मंत्रियों के वेतन में भारी कमी
प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि वे स्वयं उदाहरण पेश कर रहे हैं। वे पेट्रोल गाड़ियों के बजाय छोटी इलेक्ट्रिक कार का उपयोग करते हैं। इसका खर्च पेट्रोल से बहुत कम है और यह पर्यावरण के अनुकूल भी है। राज्यपाल द्वारा काफिले में कटौती के फैसले का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सरकार पहले ही मंत्रियों के काफिलों को छोटा कर चुकी है। फिजूलखर्ची रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।
वित्तीय अनुशासन को लेकर सीएम ने बड़े आंकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए मंत्रियों के वेतन में 30 प्रतिशत और विधायकों के वेतन में 20 प्रतिशत की अस्थायी कटौती की गई है। सरकार संसाधनों का सही इस्तेमाल सुनिश्चित कर रही है। सुक्खू ने पूर्ववर्ती भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में केवल ऊंचे भवन खड़े किए गए। इन भवनों से जनता को कोई वास्तविक लाभ नहीं मिल रहा है।
सीएम ने पीएम मोदी द्वारा घोषित 1500 करोड़ रुपये के राहत पैकेज पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राहत राशि आज तक हिमाचल को नहीं मिली है और भाजपा नेता इस पर खामोश हैं। शिमला के कमला नेहरू अस्पताल (KNH) मामले पर उन्होंने कहा कि गायनी वार्ड की शिफ्टिंग आधुनिक रोबोटिक सर्जरी की सुविधा देने के लिए की गई थी। हाईकोर्ट के आदेश का अध्ययन करने के बाद सरकार अगला कदम उठाएगी।

