हिमाचल में थमेंगे सरकारी बसों के पहिए? वेतन संकट पर भड़के HRTC कर्मचारी, दी चक्का जाम की बड़ी चेतावनी

Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश में सरकारी बस सेवा ठप होने का बड़ा खतरा मंडरा रहा है। हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) के कर्मचारियों को समय पर वेतन न मिलने से तनाव चरम पर पहुंच गया है। चालकों और परिचालकों की सख्त चेतावनी के बाद प्रबंधन ने कुछ डिपुओं में आनन-फानन में वेतन जारी किया है। हालांकि, अधिकांश कर्मचारी अब भी खाली हाथ हैं, जिससे पूरे प्रदेश में परिवहन व्यवस्था चरमराने के आसार बढ़ गए हैं।

प्रदेश के कई महत्वपूर्ण डिपुओं में बुधवार दोपहर तक वेतन न पहुंचने से कर्मचारियों का धैर्य जवाब दे गया। बैजनाथ, रिकांगपिओ और रामपुर जैसे क्षेत्रों में वेतन की आस में दोपहर बाद ही बसों का संचालन शुरू हो पाया। निगम प्रबंधन का दावा है कि वेतन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन कर्मचारी इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं। शिमला स्थित एचआरटीसी मुख्यालय के बाहर चालक-परिचालक यूनियन ने जोरदार प्रदर्शन कर अपनी नाराजगी जाहिर की है।

वेतन के लिए आर-पार की लड़ाई: यूनियन ने दी ‘ब्लैकआउट’ की चेतावनी

कर्मचारी यूनियन ने दोटूक कहा है कि यदि पूरे प्रदेश में एक साथ वेतन जारी नहीं हुआ, तो चक्का जाम कर दिया जाएगा। यूनियन के पदाधिकारियों की मांग है कि हर महीने की पहली तारीख को ही वेतन मिलना सुनिश्चित होना चाहिए। गेट मीटिंग के दौरान कर्मचारियों ने राज्य सरकार और निगम प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। यूनियन ने साफ किया कि भविष्य में भुगतान में देरी होने पर आंदोलन और अधिक उग्र होगा।

चालक यूनियन के अध्यक्ष मान सिंह ठाकुर ने प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि हड़ताल की धमकी के बाद केवल तीन डिपुओं में ही बजट जारी किया गया। शेष 27 डिपुओं के हजारों कर्मचारी अब भी अपने हक के पैसों का इंतजार कर रहे हैं। कर्मचारियों को न तो रात्रि भत्ता मिल रहा है और न ही चिकित्सा भत्तों की अदायगी हो रही है। ओवर टाइम के पैसे भी लंबे समय से लंबित पड़े हुए हैं।

यूनियन ने आरोप लगाया कि निगम की गलत नीतियां और विलासितापूर्ण पॉलिसीज वित्तीय बोझ को बढ़ा रही हैं। विभिन्न श्रेणियों को दी जा रही रियायतों का असर कर्मचारियों की जेब पर पड़ रहा है। मान सिंह ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी को वेतन नहीं मिला, तो प्रदेशभर में बसें खड़ी कर दी जाएंगी। अब देखना होगा कि सरकार इस परिवहन संकट को टालने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।

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