Himachal News: कांगड़ा जिले के नगरोटा बगवां की होनहार बेटी प्रकृति सूद ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। 23 वर्षीय प्रकृति ने सैन्य नर्सिंग सेवा में स्थायी कमीशन प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार को गौरवान्वित किया है, बल्कि समूचे क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा का नया स्रोत भी बन गई है। उनकी सफलता की गूंज अब पूरे हिमाचल में सुनाई दे रही है।
बेंगलुरु में हुई पासिंग आउट परेड
लेफ्टिनेंट प्रकृति सूद ने बेंगलुरु स्थित कमांड अस्पताल से अपना चार साल का कठोर प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया है। 8 मई को आयोजित पासिंग आउट परेड के दौरान उन्हें आधिकारिक तौर पर भारतीय सेना में शामिल किया गया। इस गौरवशाली समारोह में भारतीय वायु सेना के उप प्रमुख, एयर मार्शल नरेश सैदा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने प्रकृति को रैंक लगाकर सेना में एक सैन्य अधिकारी के रूप में विधिवत नियुक्त किया।
कठिन परिश्रम से पाया मुकाम
प्रकृति ने इस चुनौतीपूर्ण मुकाम को हासिल करने के लिए दिन-रात कड़ी मेहनत की है। उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान अनुशासन और धैर्य की कठिन परीक्षाओं को बखूबी पार किया। सैन्य नर्सिंग सेवा में अधिकारी बनना आसान नहीं होता, लेकिन प्रकृति के दृढ़ संकल्प ने इसे संभव कर दिखाया। उनकी सफलता पर नगरोटा बगवां क्षेत्र के लोगों में भारी उत्साह है। लोग उनके घर पहुंचकर माता-पिता को बधाई दे रहे हैं और इसे क्षेत्र के लिए बड़ा सम्मान मान रहे हैं।
प्रतिभाशाली परिवार से है संबंध
लेफ्टिनेंट प्रकृति सूद एक सुशिक्षित और बहुमुखी प्रतिभा वाले परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता मनीष सूद नगरोटा बगवां के वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में प्रवक्ता हैं। उनकी माता रोजी सूद भी राजकीय उच्च विद्यालय रौंखर में अध्यापिका के पद पर कार्यरत हैं। प्रकृति के माता-पिता ने हमेशा अपनी बेटी के सपनों को पंख दिए। यही कारण है कि आज उनकी बेटी देश की सीमाओं की रक्षा और सेवा के लिए सेना में उच्च पद पर आसीन हुई है।
भाई हैं नेशनल टेबल टेनिस खिलाड़ी
प्रकृति का परिवार केवल शिक्षा और सेना ही नहीं, बल्कि खेलों में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। प्रकृति का छोटा भाई एक राष्ट्रीय स्तर का होनहार टेबल टेनिस खिलाड़ी है। वह पिछले आठ वर्षों से लगातार नेशनल स्तर पर हिमाचल प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रहा है। अब तक वह 15 से अधिक राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपना शानदार प्रदर्शन कर चुका है। एक ही घर से सेना अधिकारी और नेशनल खिलाड़ी निकलना किसी मिसाल से कम नहीं है।
युवाओं के लिए बनीं मिसाल
प्रकृति की यह उपलब्धि क्षेत्र की अन्य बेटियों को भी रक्षा सेवाओं में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करेगी। आज के दौर में जब बेटियां हर क्षेत्र में अग्रणी हैं, प्रकृति ने सैन्य अधिकारी बनकर नया प्रतिमान स्थापित किया है। उनके परिजनों का कहना है कि बेटी ने बचपन से ही देश सेवा का सपना देखा था। सेना में स्थायी कमीशन मिलने के बाद अब वह देश के विभिन्न सैन्य अस्पतालों में अपनी सेवाएं देकर मानवता की रक्षा करेंगी।


