National News: फिट इंडिया के ब्रांड एंबेसडर और आईआरएस अधिकारी नरेंद्र कुमार यादव इन दिनों अपने काम और जुनून के अनूठे संगम को लेकर सुर्खियों में हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वस्थ भारत और पर्यावरण संरक्षण के विजन को धरातल पर उतारते हुए वह रोजाना करीब 8 किलोमीटर साइकिल चलाकर अपने दफ्तर जाते हैं। सरकारी गाड़ी और आलीशान सुविधाओं को छोड़कर साइकिल चुनने की उनकी यह पहल आज के प्रदूषित माहौल में युवाओं और सरकारी कर्मचारियों के लिए एक मिसाल पेश कर रही है।
प्रदूषण और ईंधन की बचत का बड़ा संदेश
नरेंद्र यादव फिलहाल जीएसटी विभाग में तैनात हैं और अपनी अनुशासित जीवनशैली के लिए मशहूर हैं। वह केवल फिट इंडिया अभियान का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि अपनी आदतों से दूसरों को प्रेरित भी करते हैं। सरकारी वाहन का त्याग कर साइकिल को तरजीह देकर वह पर्यावरण संरक्षण और व्यक्तिगत स्वास्थ्य के बीच संतुलन साध रहे हैं। उनका मानना है कि फिटनेस सिर्फ जिम तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे हमारी रोजमर्रा की दिनचर्या और उत्पादकता का हिस्सा बनना जरूरी है।
हिंदी मीडियम से यूपीएससी तक का सफर
नरेंद्र यादव का जीवन संघर्ष और कड़ी मेहनत की अद्भुत कहानी है। हिंदी मीडियम से शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद उन्होंने अपनी एकाग्रता और अनुशासन के बल पर कम उम्र में ही प्रतिष्ठित यूपीएससी परीक्षा पास की। आईआरएस अधिकारी बनने के बाद भी उन्होंने अपनी सादगी और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को कभी कम नहीं होने दिया। पिछले कई वर्षों से वह कामकाजी पेशेवरों और छात्रों के बीच संतुलित जीवन जीने के संदेश को सक्रिय रूप से फैला रहे हैं।
जल्द आ रही है किताब “Fitness & Bharat @2047”
राष्ट्र निर्माण और व्यक्तिगत फिटनेस के अंतर्संबंधों पर नरेंद्र यादव ने एक किताब “Fitness & Bharat @2047” लिखी है, जो जल्द ही प्रकाशित होगी। यह पुस्तक इस बात पर केंद्रित है कि साल 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में नागरिकों का स्वास्थ्य कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यादव के अनुसार, एक स्वस्थ नागरिक ही विकसित राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी है। वह आगाह करते हैं कि जागरूकता की कमी भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों का कारण बन सकती है।
सोशल मीडिया पर ‘रियल फिट इंडिया आइकन’
नरेंद्र यादव की साइकिल यात्रा को सोशल मीडिया पर व्यापक सराहना मिल रही है। लोग उन्हें ‘रियल फिट इंडिया आइकन’ बताकर उनकी सादगी की प्रशंसा कर रहे हैं। कई युवा प्रोफेशनल्स ने पर्यावरण और सेहत को एक साथ साधने की उनकी इस कोशिश को अपनाना शुरू किया है। उनका उदाहरण हमें याद दिलाता है कि असली बदलाव व्यक्तिगत प्रयासों से ही संभव है। स्वस्थ भारत ही विकसित, हरा-भरा और खुशहाल भारत का निर्माण कर सकता है।

