हिमाचल के 37 मंदिरों के खजाने पर सरकार का कब्जा? विहिप के इस अल्टीमेटम से गरमाई सियासत

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के प्रमुख मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने की मांग अब तेज हो गई है। विश्व हिंदू परिषद ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए मंदिरों के प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं। संगठन का दावा है कि हिंदू समाज की आस्था का पैसा प्रशासनिक कार्यों में व्यर्थ खर्च हो रहा है। परिषद ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने मंदिरों का नियंत्रण नहीं छोड़ा, तो राज्यव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। इस मुद्दे ने पूरे प्रदेश में हलचल मचा दी है।

सरकारी एक्ट और मंदिरों के प्रबंधन पर गंभीर सवाल

विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे ने राज्य के 1984 के अधिनियम की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश हिंदू सार्वजनिक धार्मिक संस्थान और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम के कारण मंदिरों की स्वायत्तता खत्म हो रही है। परांडे के अनुसार, अन्य धर्मों को अपने पूजा स्थलों के संचालन की पूरी आजादी है, जबकि हिंदू मंदिरों में सरकार हस्तक्षेप कर रही है। उनका आरोप है कि सरकारी अधिकारी और न्यासी स्वतंत्र रूप से धार्मिक निर्णय लेने में पूरी तरह अक्षम साबित हो रहे हैं।

करोड़ों का चढ़ावा और प्रशासनिक खर्च का विवाद

हिमाचल के 37 बड़े मंदिरों में हर साल करोड़ों रुपये का चढ़ावा आता है। आंकड़ों के मुताबिक, साल 2024 में इन मंदिरों की कुल आय लगभग 200.59 करोड़ रुपये दर्ज की गई है। इसके अलावा, मंदिरों की 346.26 करोड़ रुपये की राशि बैंक एफडी के रूप में जमा है। विहिप का आरोप है कि इस भारी-भरकम राशि का बड़ा हिस्सा मंदिर विकास के बजाय सरकारी तंत्र को चलाने में खर्च हो रहा है। संगठन चाहता है कि यह पैसा केवल हिंदू समाज के कल्याण में लगे।

लैंड जिहाद और अवैध कब्जों पर तीखी चेतावनी

मंदिरों की मुक्ति के साथ-साथ विहिप ने प्रदेश में ‘लैंड जिहाद’ का मुद्दा भी उठाया है। मिलिंद परांडे ने आरोप लगाया कि शिमला के संजौली और मंडी जैसे इलाकों में सरकारी जमीनों पर अवैध धार्मिक ढांचे बन रहे हैं। उन्होंने इसे सामाजिक संतुलन के लिए बड़ा खतरा बताया है। संगठन का कहना है कि सरकार इन अवैध कब्जों पर सख्त कार्रवाई करने में विफल रही है। परिषद ने लव जिहाद और धर्मांतरण को लेकर भी प्रशासन को कड़ी चेतावनी जारी की है।

असुरक्षा का माहौल और भविष्य के आंदोलन की रूपरेखा

संगठन के पदाधिकारियों ने कुल्लू, चंबा, ऊना और नूरपुर जैसे क्षेत्रों में बढ़ती घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका दावा है कि इन मुद्दों के कारण स्थानीय समाज में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। शिमला में हुई इस बैठक में डॉ. रूपराम शर्मा सहित कई दिग्गज नेता शामिल हुए। विहिप ने स्पष्ट कर दिया है कि वे सरकार के जवाब का लंबे समय तक इंतजार नहीं करेंगे। उन्होंने जल्द ही जनता को जागरूक कर सड़कों पर उतरने का संकेत दिया है।

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