Mandi News: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में पंचायत चुनाव की सरगर्मी के बीच भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला गरमा गया है। गोहर क्षेत्र के एक ग्रामीण ने पूर्व प्रधान और पंचायत सचिव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आरोप है कि कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद पूर्व प्रधान को गलत तरीके से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी किया गया है। इस शिकायत ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शिकायतकर्ता विश्वनाथ ने सहायक रिटर्निंग ऑफिसर को पत्र लिखकर पूरे मामले की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि सरकार की अधिसूचना के अनुसार पंचायत पदाधिकारियों का कार्यकाल 31 जनवरी 2026 को खत्म हो चुका है। नियमों के मुताबिक कार्यकाल खत्म होने के बाद पूर्व पदाधिकारियों को मस्टरोल और शेष सामग्री स्टॉक रजिस्टर में दर्ज करानी होती है। लेकिन यहां नियमों की धज्जियां उड़ाकर पूर्व प्रधान को क्लीन चिट दे दी गई है।
सामग्री के मूल्यांकन और स्टॉक रजिस्टर में धांधली का आरोप
शिकायत में दावा किया गया है कि ग्राम पंचायत में चल रहे विकास कार्यों का सही मूल्यांकन नहीं हुआ है। मनरेगा और अन्य योजनाओं के लिए आया अधिकांश मटेरियल गायब है। सचिव ने बिना सामग्री वापस लिए ही पूर्व प्रधान को एनओसी जारी कर दी है। ग्रामीण का कहना है कि यह सीधा-सीधा सरकारी धन का दुरुपयोग है। इस मामले ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली को भी संदेह के घेरे में ला खड़ा किया है।
पीड़ित ग्रामीण ने यह भी बताया कि साल 2022 से पंचायत में हुए घोटालों की शिकायतें लंबित हैं। विकास खंड अधिकारी से लेकर जिलाधीश मंडी और निदेशक पंचायती राज शिमला तक को इस बारे में सूचित किया गया है। आरोप है कि उच्च अधिकारियों के आदेशों की लगातार अवहेलना की जा रही है। अब पूर्व प्रधान और उनके बेटे को एनओसी जारी होना चुनावी निष्पक्षता पर एक बड़ा प्रहार माना जा रहा है।
नामांकन रद्द करने और कड़ी कार्रवाई की उठी मांग
विश्वनाथ ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए। उन्होंने आरोपी पूर्व प्रधान का नामांकन रद्द करने की भी गुहार लगाई है। ग्रामीण क्षेत्रों में इस खबर के बाद से तनाव का माहौल है। लोगों का कहना है कि अगर घोटाले के दोषियों को चुनावी मैदान में उतरने का मौका मिला, तो लोकतंत्र की गरिमा को ठेस पहुंचेगी। अब सबकी नजरें निर्वाचन अधिकारी के फैसले पर टिकी हैं।


