World News: यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है, जहां दोनों देश एक-दूसरे के आर्थिक और ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहे हैं। रविवार, 3 मई 2026 को यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने घोषणा की कि उनकी सेना ने काला सागर के रणनीतिक बंदरगाह नोवोरोस्सियस्क के प्रवेश द्वार पर रूस के ‘शैडो फ्लीट’ (अवैध तेल बेड़े) के दो बड़े तेल टैंकरों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया है। यह हमला यूक्रेन की समुद्री ड्रोन क्षमताओं में बढ़ोत्तरी का एक बड़ा प्रमाण माना जा रहा है।
अवैध तेल व्यापार पर लगाम लगाने की रणनीति
राष्ट्रपति जेलेंस्की ने टेलीग्राम के माध्यम से जानकारी दी कि ये टैंकर रूसी कच्चे तेल के अवैध परिवहन और पश्चिमी प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूक्रेन की लंबी दूरी की मारक क्षमता अब समुद्र, हवा और जमीन पर समान रूप से प्रभावी है। यूक्रेनी जनरल स्टाफ के अनुसार, इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य रूस की उन आर्थिक धमनियों को काटना है, जो युद्ध के वित्तपोषण का मुख्य जरिया बनी हुई हैं।
रूस का दावा: रातभर में मार गिराए 334 यूक्रेनी ड्रोन
दूसरी ओर, रूसी रक्षा मंत्रालय ने एक बड़ा बयान जारी करते हुए कहा कि उनके वायु रक्षा तंत्र ने रातभर में 16 अलग-अलग क्षेत्रों में कुल 334 यूक्रेनी ड्रोनों को मार गिराया है। इनमें मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग (लेनिनग्राद क्षेत्र) के पास वाले इलाके भी शामिल हैं। हालांकि, रूस ने किसी बड़े नुकसान या जानमाल की हानि की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। ड्रोन युद्ध में आई यह रिकॉर्ड बढ़ोत्तरी दर्शाती है कि युद्ध अब फ्रंटलाइन से हटकर रूस के अंदरूनी औद्योगिक शहरों तक पहुंच गया है।
तुआपसे रिफाइनरी पर 16 दिनों में चौथी बार हमला
काला सागर तट पर स्थित तुआपसे शहर में रूस की प्रमुख तेल रिफाइनरी पिछले दो हफ्तों से यूक्रेन के निशाने पर है। पिछले 16 दिनों में यहां चार बार ड्रोन हमले हुए हैं, जिससे रिफाइनरी और निर्यात टर्मिनल में भीषण आग लग गई। इन हमलों के कारण तुआपसे के लोकप्रिय पर्यटन तटों पर तेल का रिसाव होने से पर्यावरण संकट भी पैदा हो गया है। स्थानीय प्रशासन ने धुएं और जहरीले बादलों के कारण आसपास के इलाकों को खाली कराने के निर्देश दिए हैं।
बॉर्डर से 1500 किमी दूर पर्म क्षेत्र में मची अफरा-तफरी
यूक्रेन ने अपनी लंबी दूरी के ड्रोनों का लोहा मनवाते हुए रूस के पर्म क्षेत्र में स्थित एक प्रमुख तेल पंपिंग स्टेशन और रिफाइनरी को भी निशाना बनाया। यह क्षेत्र यूक्रेनी सीमा से लगभग 1,500 किलोमीटर से अधिक की दूरी पर स्थित है। पर्म के गवर्नर दिमित्री माखोनिन ने औद्योगिक केंद्रों पर ड्रोन हमले की पुष्टि की है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी दूरी पर सटीक हमला करना यूक्रेन की सैन्य तकनीक में एक बड़े रणनीतिक बदलाव का संकेत है।
सीजफायर की उम्मीदें धुंधली, तेल युद्ध हुआ तेज
यूक्रेन अब मुख्य रूप से रूस के ऊर्जा क्षेत्र को पंगु बनाने की नीति पर काम कर रहा है। हालिया हमलों ने रूस की तेल प्रसंस्करण क्षमता को साल 2022 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा दिया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी तनाव और दोनों देशों के अड़ियल रुख के कारण फिलहाल युद्ध विराम (Ceasefire) की कोई संभावना नजर नहीं आ रही है। जैसे-जैसे यूक्रेन अपनी ‘लॉन्ग रेंज’ क्षमता बढ़ा रहा है, रूस के सुरक्षित माने जाने वाले शहर भी अब सीधे खतरे की जद में आ गए हैं।


