Delhi News: ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर कांग्रेस पार्टी ने मोदी सरकार की विदेश और रक्षा नीति पर तीखे सवाल उठाए हैं। मुख्य विपक्षी दल ने आरोप लगाया कि सरकार पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने में विफल रही है। कांग्रेस ने इसकी तुलना 2008 के मुंबई हमलों के बाद की कूटनीतिक सफलता से की। पार्टी ने दावा किया कि पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व को अमेरिकी प्रशासन से विशेष समर्थन मिला। कांग्रेस ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुई सामरिक गलतियों की जांच के लिए कारगिल जैसी समीक्षा समिति बनाने की मांग की है।
ट्रंप के हस्तक्षेप और युद्धविराम पर जयराम रमेश का दावा
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर इस सैन्य अभियान के अंत को लेकर सनसनीखेज खुलासे किए हैं। उन्होंने दावा किया कि 10 मई 2025 को युद्धविराम की घोषणा अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने की थी। रमेश के अनुसार, यह सब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीधे हस्तक्षेप के कारण हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप ने इस सफलता का दावा कई बार किया, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने कभी इसका खंडन नहीं किया। इससे सरकार की कूटनीतिक स्वायत्तता पर सवाल खड़े होते हैं।
जनरल अनिल चौहान और सैन्य नेतृत्व के बयानों का हवाला
कांग्रेस ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान के पुराने बयानों का भी संदर्भ दिया है। पार्टी के अनुसार, जनरल चौहान ने स्वीकार किया था कि शुरुआती चरण में भारत को सामरिक गलतियों के कारण नुकसान हुआ। जयराम रमेश ने जकार्ता में रक्षा अताशे के उस बयान का भी जिक्र किया जिसमें विमानों के नुकसान की बात कही गई थी। कांग्रेस का कहना है कि राजनीतिक नेतृत्व द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के कारण वायुसेना को भारी कीमत चुकानी पड़ी थी।
चीन की भूमिका और मोदी सरकार की ‘नरम’ नीति पर प्रहार
विपक्षी दल ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को मिली चीनी मदद पर गंभीर चिंता जताई है। कांग्रेस ने लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह के बयान का हवाला दिया कि चीन ने पाकिस्तान को सैटेलाइट इमेजरी और गोला-बारूद दिया। इसके बावजूद कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार चीन के प्रति नरम रुख अपना रही है। पार्टी ने लद्दाख में गश्त अधिकारों के नुकसान और चीन से बढ़ते रिकॉर्ड आयात को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया है।
कारगिल की तर्ज पर जांच समिति बनाने की उठी मांग
जयराम रमेश ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल का उदाहरण देते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि कारगिल युद्ध के बाद के. सुब्रह्मण्यम समिति बनाई गई थी जिसने भविष्य के लिए अहम सुझाव दिए थे। कांग्रेस का मानना है कि ऑपरेशन सिंदूर की भी इसी तरह की निष्पक्ष समीक्षा जरूरी है। इससे यह पता चल सकेगा कि किन कारणों से भारत को शुरुआती नुकसान उठाना पड़ा और भविष्य में ऐसी सामरिक गलतियों को कैसे रोका जा सकता है।
क्या था ऑपरेशन सिंदूर और इसकी पृष्ठभूमि?
पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले के प्रतिशोध में भारत ने यह ऑपरेशन शुरू किया था। उस हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान गई थी, जिसके बाद 7 मई को वायुसेना ने सीमा पार नौ आतंकी ठिकानों को तबाह किया। इस कार्रवाई से दोनों देशों के बीच युद्ध जैसी स्थिति पैदा हो गई थी। हालांकि, 10 मई को हॉटलाइन वार्ता के बाद सैन्य तनाव कम हुआ। अब एक साल बाद कांग्रेस ने इस पूरी प्रक्रिया और सरकार की कूटनीति पर नए सिरे से राजनीतिक बहस छेड़ दी है।

