होर्मुज़ जलडमरूमध्य संकट: सऊदी अरब के कड़े रुख के आगे झुके ट्रंप? ‘ऑपरेशन फ़्रीडम’ रद्द होने के पीछे की असली कहानी

United States News: होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा के लिए शुरू किया गया अमेरिकी ‘ऑपरेशन फ़्रीडम’ अब बड़े विवादों के घेरे में है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अचानक इस मिशन को रोकने के पीछे अब सऊदी अरब का दबाव होने की खबरें सामने आ रही हैं। हालांकि ट्रंप ने पहले इस फैसले के लिए पाकिस्तान का जिक्र किया था, लेकिन नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार सऊदी अरब ने अमेरिकी लड़ाकू विमानों को अपने हवाई क्षेत्र और एयरबेस के इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।

सऊदी क्राउन प्रिंस और ट्रंप के बीच नहीं बनी सहमति

एनबीसी न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने बिना सहयोगियों से चर्चा किए सोशल मीडिया पर इस ऑपरेशन का ऐलान किया था। इस एकतरफा फैसले से खाड़ी क्षेत्र के सहयोगी देश, विशेषकर सऊदी अरब काफी नाराज था। बताया जा रहा है कि ट्रंप ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से इस मुद्दे पर लंबी बातचीत की, लेकिन कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई। नतीजतन, दो दिनों में केवल तीन जहाजों को सुरक्षित निकालने के बाद अमेरिका को यह अभियान रद्द करना पड़ा।

US-ईरान 14-सूत्रीय समझौता: शांति की उम्मीद या कूटनीतिक दांव?

कूटनीतिक मोर्चे पर पिछले 24 घंटों में हलचल काफी तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच एक 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) तैयार किया गया है। हालांकि इस दस्तावेज को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है, लेकिन विशेषज्ञ इसे शांति की दिशा में एक बड़ी प्रगति मान रहे हैं। कूटनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि यह समझौता सफल होता है, तो मध्य पूर्व में जारी तनाव को कम करने में बड़ी मदद मिल सकती है।

UNSC में नया प्रस्ताव और ईरान की तीखी प्रतिक्रिया

अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक नया प्रस्ताव पेश किया है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जहाजों की बेरोकटोक आवाजाही को फिर से सुनिश्चित करना है। दूसरी ओर, ईरान ने इस कदम का कड़ा विरोध करते हुए सुरक्षा परिषद के अन्य सदस्य देशों से इस प्रस्ताव को खारिज करने की अपील की है। तेहरान का तर्क है कि इस क्षेत्र में किसी भी बाहरी हस्तक्षेप से सुरक्षा स्थिति और अधिक बिगड़ सकती है।

चीन-ईरान बैठक: बीजिंग में तेहरान को मिला समर्थन का भरोसा

ईरान और चीन के बीच बीजिंग में हुई उच्च-स्तरीय बैठक ने वैश्विक राजनीति का पारा बढ़ा दिया है। चीन ने इस क्षेत्र में शत्रुता को तत्काल समाप्त करने की मांग की है और ईरान को अपना समर्थन देने का वादा किया है। ईरान इस समय पूरी सावधानी बरत रहा है कि ट्रंप की आगामी चीन यात्रा के दौरान बीजिंग अमेरिकी दबाव में न आए। तेहरान चाहता है कि चीन कोई भी ऐसा फैसला न ले जिससे ईरान के हितों को चोट पहुंचे।

ट्रंप की चेतावनी: “स्थिति नियंत्रण में है, वरना हमले होंगे तेज”

राष्ट्रपति ट्रंप ने ताजा बयान में दावा किया है कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने ईरान के सैन्य ढांचे को पंगु बना दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान की नौसेना, वायुसेना और मिसाइल नेटवर्क को भारी नुकसान पहुंचा है। ट्रंप ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि वर्तमान स्थिति उनके पूर्ण नियंत्रण में है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि ईरान समझौते के लिए राजी नहीं होता है, तो अमेरिकी सेना पहले से भी कहीं अधिक घातक और तीव्र हमले करने के लिए तैयार है।

होरमुज़ में फ्रांसीसी जहाज पर हमला, चालक दल घायल

क्षेत्र में असुरक्षा का माहौल तब और गहरा गया जब फ्रांसीसी शिपिंग कंपनी CMA CGM के एक मालवाहक जहाज को निशाना बनाया गया। कंपनी के अनुसार, होर्मुज़ जलडमरूमध्य के पास उनके जहाज पर मिसाइल या ड्रोन से हमला किया गया है। इस हमले में चालक दल के कई सदस्य घायल हुए हैं और जहाज को भी नुकसान पहुंचा है। यह घटना दर्शाती है कि कूटनीतिक वार्ताओं के बावजूद समुद्र में जहाजों के लिए खतरा टला नहीं है।

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