West Bengal News: चुनाव में हार के बाद तृणमूल अध्यक्ष ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद छोड़ने से साफ इनकार कर दिया है। कालीघाट स्थित आवास पर विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के साथ उन्होंने अहम बैठक की। ममता बनर्जी ने इस दौरान बेहद आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने विरोधियों को सीधे चुनौती दी कि वे चाहें तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दें। चुनाव नतीजों को खारिज करते हुए उन्होंने इसे बड़ी धांधली का स्पष्ट परिणाम बताया है।
सुप्रीम कोर्ट और अंतरराष्ट्रीय अदालत जाने की चेतावनी
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका दावा है कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में बड़े पैमाने पर भारी गड़बड़ी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा को लगभग 100 सीटों पर गलत तरीके से जिताया गया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी असली लड़ाई भाजपा से नहीं बल्कि चुनाव आयोग से थी। उन्होंने इस चुनावी लूट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट और जरूरत पड़ने पर अंतरराष्ट्रीय अदालत का दरवाजा खटखटाने की कड़ी चेतावनी दी है।
पार्टी में शामिल गद्दारों की बनेगी विशेष सूची
पार्टी के भीतर भितरघात करने वाले नेताओं पर भी ममता बनर्जी ने सख्त कार्रवाई के स्पष्ट संकेत दिए हैं। उन्होंने पदाधिकारियों को चुनाव में पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों की विस्तृत सूची बनाने का निर्देश दिया। अगले सप्ताह से फैक्ट फाइंडिंग टीमें राज्य भर में हार के कारणों की जांच करेंगी। भाजपा के शपथ ग्रहण समारोह के दिन नौ मई को विरोध स्वरूप सभी तृणमूल कार्यालयों में केवल रवींद्र संगीत बजाने का कड़ा फैसला लिया गया है।
बैठक से 11 विधायकों की गैरमौजूदगी से बढ़ा सस्पेंस
इस अहम बैठक में 11 नवनिर्वाचित विधायकों की अनुपस्थिति ने नई राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दे दिया है। इन विधायकों के जल्द पाला बदलने की अटकलें अब काफी तेज हो गई हैं। वहीं ममता बनर्जी ने इस कठिन दौर में अभिषेक बनर्जी के प्रयासों की खुलकर तारीफ की। अभिषेक ने कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाते हुए स्पष्ट किया कि हिंसा की शिकायत पुलिस में दर्ज न होने पर वे ऑनलाइन पोर्टल का उपयोग करें। उन्होंने कहा कि दीदी ही आगे पार्टी का नेतृत्व करेंगी।


