International News: पत्रकारिता के क्षेत्र में दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित ‘पुलित्जर पुरस्कार 2026’ की घोषणा हो गई है। इस बार दो भारतीय पत्रकारों, आनंद आरके और सुपर्णा शर्मा ने यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। उन्हें डिजिटल निगरानी और वैश्विक साइबर धोखाधड़ी के काले सच को उजागर करने के लिए इस सम्मान से नवाजा गया है। कोलंबिया यूनिवर्सिटी द्वारा संचालित यह पुरस्कार पत्रकारिता और साहित्य जगत का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है।
डिजिटल अरेस्ट और ‘ट्रैप्ड’ की झकझोर देने वाली कहानी
आनंद और सुपर्णा को ‘इलस्ट्रेटेड रिपोर्टिंग एंड कमेंट्री’ श्रेणी में विजेता घोषित किया गया है। उन्होंने यह सम्मान ब्लूमबर्ग की नताली ओबिको पियर्सन के साथ साझा किया। उनकी रिपोर्ट ‘ट्रैप्ड’ (Trapped) भारत की एक न्यूरोलॉजिस्ट की कहानी पर आधारित है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ के जरिए प्रताड़ित किया गया। शब्दों और चित्रों के बेहतरीन समावेश ने साइबर अपराध के वैश्विक खतरे को प्रभावी ढंग से पेश किया है।
चीन पर खोजी रिपोर्टिंग के लिए एपी को मिला पुरस्कार
एसोसिएटेड प्रेस (एपी) ने ‘इंटरनेशनल रिपोर्टिंग’ श्रेणी में पुलित्जर पुरस्कार अपने नाम किया है। एपी के पत्रकारों ने चीन में सरकारी निगरानी और उसमें अमेरिकी तकनीकी कंपनियों की भूमिका का खुलासा किया था। पुरस्कार पाने वाली टीम में डेक कांग, गैरांस बर्क, बायरन ताउ, अनिरुद्ध घोषाल और येल ग्राउर शामिल हैं। उनकी खोजी रिपोर्टिंग ने दिखाया कि कैसे आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल नागरिकों की प्राइवेसी में सेंध लगाने के लिए किया जा रहा है।
डोनाल्ड ट्रंप और मेटा पर रिपोर्टिंग के लिए रॉयटर्स को दो सम्मान
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने इस बार दो श्रेणियों में पुलित्जर पुरस्कार जीतकर अपनी धाक जमाई है। रॉयटर्स को पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राजनीतिक अभियानों की कवरेज के लिए सम्मानित किया गया। इसके अलावा, मेटा कंपनी के एआई चैटबॉट्स और धोखाधड़ी वाले विज्ञापनों से यूजर्स को होने वाले नुकसान की रिपोर्टिंग के लिए भी उसे सराहा गया। इन खबरों ने तकनीकी दिग्गज कंपनियों की जवाबदेही और राजनीतिक शुचिता पर बड़े सवाल खड़े किए थे।
पत्रकारिता में साहस और जवाबदेही का नया अध्याय
पुलित्जर पुरस्कारों की यह सूची पत्रकारिता में साहस और गहन शोध के महत्व को रेखांकित करती है। भारतीय पत्रकारों की यह जीत वैश्विक स्तर पर भारतीय मीडिया की बढ़ती साख का प्रमाण है। डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी जैसे जटिल विषयों को सरलता से जनता के सामने रखना एक बड़ी चुनौती थी। इन पत्रकारों ने अपनी रिपोर्टिंग के जरिए न केवल पीड़ितों को आवाज दी, बल्कि सरकारों को भी सतर्क किया है।


