Karnataka News: कर्नाटक हाई कोर्ट ने श्रृंगेरी विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी डीएन जीवराज को बड़ी राहत दी है। अदालत ने डाक मतों से कथित छेड़छाड़ के मामले में उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद कर दिया है। जस्टिस वी. श्रीशनंदा की पीठ ने पुलिस और प्रशासन को राजनीतिक दबाव में काम न करने की कड़ी चेतावनी दी। अदालत ने सवाल उठाया कि 2023 की घटना पर 2026 में केस दर्ज करना पूरी तरह अनुचित है। इस फैसले ने राज्य की सियासत में नई बहस छेड़ दी है।
डाक मतों की पुनर्गणना में बदला चुनावी नतीजा
वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राजेगौड़ा को पहले 201 वोटों से विजयी घोषित किया गया था। भाजपा उम्मीदवार जीवराज ने इस परिणाम को हाई कोर्ट में चुनौती दी और डाक मतों की दोबारा गिनती की मांग की। अप्रैल में हुई पुनर्गणना के दौरान समीकरण पूरी तरह बदल गए। इस प्रक्रिया में राजेगौड़ा के 255 डाक मत अवैध पाए गए। परिणाम स्वरूप जीवराज 52 वोटों के अंतर से विजेता बनकर उभरे। इस नाटकीय बदलाव के बाद कांग्रेस ने धांधली के गंभीर आरोप लगाए थे।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर हाई कोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल
हाई कोर्ट की अवकाशकालीन पीठ ने पुलिस और चुनाव अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने पूछा कि यदि मतपेटिकाओं से छेड़छाड़ हुई थी, तो इसे पहले संज्ञान में क्यों नहीं लाया गया। पीठ ने तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर के खिलाफ केस दर्ज करने पर भी आपत्ति जताई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत ऐसी कार्रवाई न्यायसंगत नहीं है। जस्टिस श्रीशनंदा ने जांच अधिकारी को तलब करते हुए अगली सुनवाई के लिए सात मई की तारीख निर्धारित की है।
सिद्धरमैया और शिवकुमार का भाजपा पर तीखा हमला
मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने इस मामले को ‘वोट चोरी’ के बजाय ‘वोट डकैती’ करार दिया है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि भाजपा ने चुनावी मशीनरी का दुरुपयोग कर जीवराज को जिताया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, पूरी गिनती प्रक्रिया में हेराफेरी की गई है। वहीं, उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने इसे देश की सबसे बड़ी चुनावी साजिश बताया है। उन्होंने घोषणा की है कि कांग्रेस इस धांधली के खिलाफ कानूनी लड़ाई जारी रखेगी और जनता के बीच जाएगी।
राजनीतिक रस्साकशी के बीच कानूनी पेच
अदालत ने फिलहाल मामले में किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। भाजपा इस फैसले को सत्य की जीत बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे लोकतंत्र पर हमला करार दे रही है। श्रृंगेरी सीट का यह विवाद अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। निर्वाचन आयोग और अदालती आदेशों के बीच फंसा यह मामला आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है। सभी की नजरें अब सात मई को होने वाली अगली अदालती कार्यवाही पर टिकी हैं।


