India News: अमेरिकी सैन्य विशेषज्ञ जॉन स्पेंसर ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली वर्षगांठ पर भारत की रणनीतिक जीत की जमकर प्रशंसा की है। स्पेंसर के अनुसार भारतीय वायुसेना ने महज 72 घंटों के भीतर पाकिस्तान के हवाई रक्षा तंत्र को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया था। इस अभियान के जरिए भारत ने आसमान में अपनी पूर्ण श्रेष्ठता स्थापित की। अमेरिकी सेना के पूर्व मेजर रहे स्पेंसर ने बताया कि यह शानदार सफलता किसी एक आकस्मिक हमले का नहीं, बल्कि कई दिनों की सूक्ष्म योजना का परिणाम थी।
लक्षित हमलों से पाकिस्तानी रडार सिस्टम हुआ पंगु
मई 2025 में भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पीओके स्थित आतंकी ठिकानों पर जोरदार प्रहार किए थे। इसके बाद 8 मई को भारत ने पाकिस्तानी हवाई रक्षा प्रणालियों को निशाना बनाना शुरू किया। चूनियां और पासरूर में स्थित अर्ली वार्निंग रडार और HQ-9 मिसाइल बैटरियों पर सटीक हमले किए गए। इन हमलों में आधुनिक लॉइटरिंग मुनिशन यानी ड्रोन तकनीक का व्यापक इस्तेमाल हुआ। इस रणनीति ने पाकिस्तान की कमांड और जवाब देने की क्षमता को बुरी तरह प्रभावित कर दिया था।
S-400 एयर डिफेंस सिस्टम ने बदला युद्ध का रुख
जॉन स्पेंसर के विश्लेषण के मुताबिक भारत के S-400 एयर डिफेंस सिस्टम ने इस जंग में ‘गेम चेंजर’ की भूमिका निभाई। इस सिस्टम ने पाकिस्तानी विमानों को 300 किलोमीटर की दूरी से ही टारगेट करना शुरू कर दिया था। इसके कारण पाकिस्तानी वायुसेना के ऑपरेशन का दायरा बेहद सीमित हो गया और उनके पायलटों को हर कदम पर पीछे हटना पड़ा। भारतीय स्वदेशी तकनीक ने दुश्मन के रडार और मिसाइल सिस्टम को लगातार दबाव में रखकर उन्हें निष्क्रिय कर दिया।
स्वदेशी तकनीक और बेहतर एकीकरण से मिली बढ़त
भारत ने अपनी एकीकृत एयर डिफेंस सिस्टम IACCCS और आकाश मिसाइल का इस युद्ध में बेहतरीन प्रदर्शन किया। इन प्रणालियों ने पाकिस्तान की ओर से किए गए सैकड़ों ड्रोन और मिसाइल हमलों को हवा में ही नाकाम कर दिया। स्पेंसर ने जोर देकर कहा कि आधुनिक युद्ध में केवल लड़ाकू विमान नहीं, बल्कि एक समन्वित सिस्टम लड़ता है। भारत के पास बेहतर योजना और स्वदेशी तकनीक का मजबूत मेल था, जिसने उसे पाकिस्तान पर निर्णायक बढ़त दिलाई।
चीनी हथियारों पर निर्भरता पाकिस्तान को पड़ी भारी
युद्ध के दौरान पाकिस्तान की मुख्य निर्भरता चीन से मिले हथियारों और रक्षा प्रणालियों पर रही। जॉन स्पेंसर के अनुसार ये हथियार शुरुआत में कुछ प्रभावी दिखे, लेकिन भारतीय रणनीति के सामने जल्द ही नाकाफी साबित हुए। 10 मई को जब पाकिस्तान की मांग पर युद्धविराम हुआ, तब तक भारत हवाई क्षेत्र पर पूरी तरह हावी हो चुका था। यह अभियान दुनिया भर के सैन्य विश्लेषकों के लिए आधुनिक युद्ध कौशल और तकनीकी श्रेष्ठता का एक बड़ा सबक बनकर उभरा है।

