New Delhi News: सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने मंगलवार को ‘इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन’ को कड़ी फटकार लगाई। इसी संगठन की याचिका पर 2006 में सबरीमाला मंदिर विवाद की शुरुआत हुई थी। मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने संगठन की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने संस्था से पूछा कि आपने याचिका क्यों दायर की और क्या आप पूरे देश के मुख्य पुजारी हैं। सीजेआई ने कहा कि अदालत को अखबारों पर आधारित ऐसी याचिका तुरंत खारिज कर देनी चाहिए थी।
संस्था की आस्था पर उठाए सवाल
जस्टिस बीवी नागरत्ना ने पूछा कि किसी कानूनी संस्था की व्यक्तिगत आस्था कैसे हो सकती है। उन्होंने कहा कि आस्था किसी व्यक्ति विशेष की होती है और एक संस्था की कोई अंतरात्मा नहीं होती। अदालत ने कहा कि देवता में सच्ची आस्था रखने वाले लोग ही सभी धार्मिक नियमों का पालन करते हैं। जो लोग नियमों को तोड़ना चाहते हैं, अदालत उन्हें कभी सच्चा श्रद्धालु नहीं मान सकती है।
जनहित याचिकाओं के दुरुपयोग पर चिंता
पीठ ने जनहित याचिकाओं के बढ़ते दुरुपयोग पर अपनी सख्त टिप्पणी दर्ज की। जजों ने कहा कि आजकल लोग पीआईएल को निजी, प्रचार, पैसे और राजनीतिक हितों का साधन बना रहे हैं। जस्टिस नागरत्ना ने याचिकाकर्ता के वकील रवि प्रकाश गुप्ता से इस मुद्दे पर तीखे सवाल किए। उन्होंने कहा कि लॉयर्स एसोसिएशन को युवा वकीलों के कल्याण और मदद के लिए काम करना चाहिए। जजों ने ऐसे धार्मिक मामलों में बेवजह दखल देने को कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया।
अखबारों की खबरों पर आधारित थी याचिका
अदालत में यह तथ्य सामने आया कि संस्था ने याचिका केवल अखबारों की खबरों पर तैयार की थी। जून 2006 में छपे चार लेखों के आधार पर ही संस्था ने जनहित याचिका दायर कर दी। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि जजों को ऐसी याचिकाओं को सीधे डस्टबिन में डाल देना चाहिए था। इसी संगठन की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। उस फैसले ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी थी।

