Chandigarh News: केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासन ने शहर में निवेश और उद्यमशीलता को नई ऊंचाई देने के लिए ‘राइट टू बिजनेस’ ढांचे को लागू करने का ऐतिहासिक प्रस्ताव रखा है। यह क्रांतिकारी पहल केंद्र सरकार के ‘डीरिगुलेशन अभियान 2.0’ के तहत शुरू की जा रही है। इसके लागू होने से चंडीगढ़ में व्यापार करना न केवल आसान होगा, बल्कि उद्यमियों को लालफीताशाही से भी बड़ी राहत मिलेगी। पंजाब राइट टू बिजनेस अधिनियम 2020 के तर्ज पर तैयार इस कानून से शहर का औद्योगिक स्वरूप पूरी तरह बदलने की उम्मीद है।
इन-प्रिंसिपल अप्रूवल: बिना लंबी औपचारिकताओं के शुरू होगा काम
प्रस्तावित कानून की सबसे बड़ी विशेषता “इन-प्रिंसिपल अप्रूवल प्रमाणपत्र” की व्यवस्था है। इसके तहत पात्र नए उद्यमों और विस्तार कर रहे मौजूदा उद्योगों को एक शुरुआती सर्टिफिकेट दिया जाएगा। इस सर्टिफिकेट के मिलते ही उद्यमी बिना सभी पूर्व अनुमतियों के अपना कामकाज शुरू कर सकेंगे। यह प्रमाणपत्र साढ़े तीन साल तक वैध रहेगा, जिससे स्टार्टअप्स और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME) को शुरुआती संघर्ष के समय में सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी।
चंडीगढ़ ब्यूरो ऑफ एंटरप्राइज का होगा गठन
प्रशासन इस पूरी व्यवस्था को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए ‘चंडीगढ़ ब्यूरो ऑफ एंटरप्राइज एंड इन्वेस्टमेंट’ की स्थापना करेगा। यह ब्यूरो एक ‘सिंगल विंडो’ प्रणाली के रूप में कार्य करेगा, जहां निवेशकों को सभी प्रकार की मंजूरियां, शिकायत निवारण और प्रोत्साहन एक ही छत के नीचे मिलेंगे। पूरी प्रक्रिया को डिजिटल पोर्टल के माध्यम से संचालित किया जाएगा, जिससे मानवीय हस्तक्षेप कम होगा और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी। यह कदम चंडीगढ़ को एक निवेश-अनुकूल गंतव्य के रूप में स्थापित करेगा।
5 से 15 दिनों में मिलेगी मंजूरी, वरना माना जाएगा ‘डीम्ड अप्रूवल’
नए ढांचे के तहत विभिन्न विभागों जैसे भवन नक्शा, श्रम पंजीकरण, प्रदूषण बोर्ड और बिजली-पानी कनेक्शन की अनुमतियों को एकीकृत कर दिया गया है। प्रशासन ने इन मंजूरियों के लिए 5 से 15 दिनों की कड़ी समयसीमा निर्धारित की है। यदि कोई विभाग तय समय के भीतर जवाब या मंजूरी नहीं देता है, तो उसे ‘डीम्ड अप्रूवल’ यानी स्वतः मंजूर मान लिया जाएगा। इससे परियोजनाओं की देरी समाप्त होगी और समयबद्ध तरीके से उद्योग धरातल पर उतर सकेंगे।
निरीक्षण केवल शिकायत पर, उद्यमियों को मिलेगा भरोसा
कारोबारियों को होने वाली परेशानी को कम करने के लिए प्रशासन ने निरीक्षण (Inspection) प्रणाली में भी बड़े बदलाव किए हैं। साढ़े तीन साल की शुरुआती अवधि के दौरान किसी भी उद्योग का निरीक्षण केवल तभी होगा जब उसके खिलाफ कोई गंभीर शिकायत प्राप्त होगी। यह ‘स्व-घोषणा’ (Self-Declaration) प्रणाली पर आधारित मॉडल है, जो उद्यमियों पर विश्वास जताता है। इससे व्यापारिक माहौल में सुधार होगा और उद्यमी बिना किसी भय के अपने व्यापार के विस्तार पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।
शहर में बढ़ेंगे रोजगार के अवसर और आर्थिक विकास
‘राइट टू बिजनेस’ लागू होने से न केवल व्यापार सुगम होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के हजारों नए अवसर भी पैदा होंगे। औद्योगिक विकास की गति तेज होने से चंडीगढ़ की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और स्टार्टअप कल्चर को बढ़ावा मिलेगा। आईटी सेक्टर से लेकर विनिर्माण इकाइयों तक, सभी क्षेत्रों के लिए यह कानून एक वरदान साबित हो सकता है। प्रशासन को उम्मीद है कि इस पहल के बाद बड़े कॉर्पोरेट घराने भी चंडीगढ़ को अपना बेस बनाने के लिए आकर्षित होंगे।


