Delhi News: भारत की राजधानी दिल्ली एक बार फिर महिलाओं के लिए देश का सबसे असुरक्षित महानगर बनकर उभरी है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ताजा ‘क्राइम इन इंडिया 2024’ रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली लगातार चौथे साल इस शर्मनाक सूची में शीर्ष पर बनी हुई है। हालांकि शहर में कुल आईपीसी और बीएनएस अपराधों में 15.1% की गिरावट आई है, लेकिन महिलाओं के खिलाफ होने वाले जघन्य अपराधों के आंकड़े अब भी अन्य बड़े शहरों की तुलना में काफी डराने वाले हैं।
बलात्कार और पॉक्सो मामलों में दिल्ली ने सबको पीछे छोड़ा
दिल्ली में साल 2024 के दौरान महिलाओं के खिलाफ अपराध के कुल 13,396 मामले दर्ज किए गए। सबसे चिंताजनक स्थिति बलात्कार के मामलों में है, जहां राजधानी में कुल 1,058 केस सामने आए। यह संख्या जयपुर (497) और मुंबई (411) जैसे शहरों के मुकाबले दोगुने से भी अधिक है। इसके अलावा, नाबालिगों के साथ होने वाले यौन अपराधों (POCSO) में भी दिल्ली 1,553 मामलों के साथ मुंबई को पीछे छोड़ते हुए पहले स्थान पर काबिज है, जो सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाता है।
घरेलू हिंसा और अपहरण के आंकड़ों में भारी उछाल
राजधानी में सिर्फ सड़क ही नहीं, बल्कि घर के भीतर भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता के 4,647 मामले सामने आए हैं। अपहरण की बात करें तो महिलाओं के साथ ऐसी 3,974 घटनाएं दर्ज की गईं। वर्तमान में दिल्ली पुलिस के पास 31,000 से अधिक मामले जांच के दायरे में हैं। यह संख्या देश के 19 प्रमुख महानगरों में दर्ज कुल मामलों का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है, जो न्यायिक प्रक्रिया की गति पर भी सवालिया निशान लगाता है।
बच्चों के लिए राष्ट्रीय औसत से तीन गुना अधिक खतरा
एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली बच्चों की सुरक्षा के मामले में भी बेहद खराब स्थिति में है। साल 2024 में बच्चों के खिलाफ कुल 7,662 अपराध दर्ज किए गए। राजधानी में बच्चों के प्रति अपराध की दर प्रति एक लाख पर 138.4 है, जबकि इसका राष्ट्रीय औसत महज 42.3 है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इन मामलों में चार्जशीट दाखिल करने की दर केवल 31.7% रही है। यह आंकड़ा राष्ट्रीय स्तर के औसत 61.4% के मुकाबले काफी कम और निराशाजनक है।
सुरक्षा की भावना बनाम जागरूकता का तर्क
प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस का तर्क है कि दिल्ली में अपराधों की ऊंची संख्या बेहतर रिपोर्टिंग और बढ़ती जागरूकता का परिणाम है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि केवल आंकड़ों में मामूली गिरावट या जागरूकता का तर्क सुरक्षा की भावना पैदा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। दिल्ली में कुल अपराध दर 176.8 प्रति लाख है, जो अन्य महानगरों की तुलना में काफी अधिक है। महिलाओं और बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के लिए कागजी आंकड़ों से इतर अब धरातल पर कड़े कदम उठाने की जरूरत है।

