हीट एक्शन प्लान: दिल्ली में रैन बसेरों की तर्ज पर बने ‘कूलिंग जोन’, भीषण लू से मिलेगी राहत

New Delhi News: राष्ट्रीय राजधानी में भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने एक अनूठी पहल की है। रैन बसेरों की तर्ज पर अब शहर के विभिन्न हिस्सों में ‘कूलिंग जोन’ स्थापित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों को विशेष रूप से उन लोगों के लिए बनाया गया है जिन्हें दिन के समय चिलचिलाती धूप में बाहर रहना पड़ता है। पहला कूलिंग जोन जामा मस्जिद मेट्रो स्टेशन के बाहर शुरू किया गया है, जहां नागरिक सुबह से शाम तक विश्राम कर सकते हैं।

कूलिंग जोन में उपलब्ध सुविधाएं और प्रबंधन

प्रत्येक कूलिंग जोन को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है ताकि लोगों को तत्काल राहत मिल सके। यहां लगभग 100 कुर्सियां, 10 बड़े कूलर और पीने के पानी की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, हीट स्ट्रोक से बचाव के लिए ओआरएस (ORS) के पैकेट और प्राथमिक चिकित्सा किट भी उपलब्ध कराई जा रही है। इन केंद्रों के सुचारु संचालन के लिए दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) के कर्मचारियों को तैनात किया गया है, जो किसी भी आपात स्थिति में सहायता करेंगे।

प्रमुख मेट्रो स्टेशनों और बस स्टॉप पर विस्तार

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह योजना केवल एक केंद्र तक सीमित नहीं रहेगी। आने वाले दिनों में दिल्ली के सभी प्रमुख मेट्रो स्टेशनों और व्यस्त बस स्टॉप के पास ऐसे और भी कूलिंग जोन बनाए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य उन क्षेत्रों को कवर करना है जहां यात्रियों और पैदल चलने वालों की संख्या सबसे अधिक होती है। इन अस्थायी आश्रयों के माध्यम से श्रमिक वर्ग और राहगीरों को गर्मी से होने वाली बीमारियों से बचाने की योजना है।

विशेषज्ञों ने दी वार्ड स्तर पर विस्तार की सलाह

पर्यावरण और विकास क्षेत्र के विशेषज्ञों ने सरकार के इस कदम की सराहना की है, लेकिन इसे और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कुछ सुझाव भी दिए हैं। ‘इराडे’ के उप निदेशक रोहित मगोत्रा का मानना है कि हीटवेव रिस्पॉन्स वैन को जिला स्तर के बजाय वार्ड स्तर पर तैनात किया जाना चाहिए। इससे जमीनी स्तर पर अधिक लोग लाभान्वित हो सकेंगे। विशेषज्ञों ने सार्वजनिक भवनों में एसी अनिवार्य करने और ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग कूलिंग के लिए करने की वकालत भी की है।

बढ़ती आर्द्रता और ‘शहरी हीट आइलैंड’ की चुनौती

सीईईडब्ल्यू (CEEW) के फेलो डॉ. विश्वास चितले ने कहा कि हीट एक्शन प्लान को जोखिम-आधारित नियोजन के साथ जोड़ना अनिवार्य है। उन्होंने बढ़ती आर्द्रता और शहरी हीट आइलैंड जैसे कारकों को ध्यान में रखने पर जोर दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, ‘कूल रूफ’ और पैरामीट्रिक बीमा जैसे समाधानों को मुख्यधारा में लाकर ही संवेदनशील समुदायों और श्रमिकों को दीर्घकालिक सुरक्षा प्रदान की जा सकती है। दिल्ली का यह मॉडल अन्य शहरों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।

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