Bengaluru News: कर्नाटक की राजनीति में एक बेहद दुर्लभ और कानूनी जीत का मामला सामने आया है। श्रृंगेरी विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी डीएन जीवराज ने चुनाव के तीन साल बाद विधायक के रूप में शपथ ली है। बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष यूटी खादर ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। जीवराज ने श्रृंगेरी की अधिष्ठात्री देवी शारदाम्बा के नाम पर अपनी शपथ ली, जिससे भाजपा खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई है।
डाक मतों की पुनर्गणना ने बदला चुनावी नतीजा
वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान श्रृंगेरी सीट पर कांग्रेस के टीडी राजेगौड़ा को मात्र 201 वोटों के अंतर से विजयी घोषित किया गया था। इस नजदीकी मुकाबले के बाद भाजपा नेता डीएन जीवराज ने हार नहीं मानी और डाक मतों (Postal Ballots) की गिनती में विसंगतियों का आरोप लगाया। उन्होंने न्याय के लिए कर्नाटक हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और डाक मतों की दोबारा गिनती सुनिश्चित करने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी।
हाई कोर्ट के हस्तक्षेप से मिली भाजपा को जीत
कर्नाटक हाई कोर्ट के कड़े आदेश के बाद चुनाव आयोग ने मतों की पुनर्गणना की प्रक्रिया शुरू की। इस दोबारा गिनती में चुनावी नतीजे पूरी तरह पलट गए और डीएन जीवराज को 52 मतों से विजेता घोषित किया गया। इस ऐतिहासिक परिणाम की आधिकारिक घोषणा तीन मई को की गई थी। इस जीत ने न केवल जीवराज के राजनीतिक धैर्य को साबित किया है, बल्कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता के महत्व को भी रेखांकित किया है।
कांग्रेस को लगा बड़ा झटका, भाजपा का बढ़ा कद
इस कानूनी और राजनीतिक घटनाक्रम ने सत्तापक्ष कांग्रेस के लिए असहज स्थिति पैदा कर दी है। विधानसभा में भाजपा की सदस्य संख्या में एक और विधायक की वृद्धि हुई है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला भविष्य के चुनावों के लिए एक मिसाल बनेगा, जहां बहुत कम अंतर से हारने वाले उम्मीदवार अदालती कार्यवाही का सहारा ले सकते हैं। फिलहाल, श्रृंगेरी क्षेत्र में जीवराज के समर्थकों द्वारा जीत का जश्न मनाया जा रहा है।


