Uttar Pradesh News: महिलाओं को साइबर और डिजिटल धोखाधड़ी से बचाने के लिए बुधवार को ‘स्त्री सक्षम’ मोबाइल एप लॉन्च किया गया। यह एप अब गूगल प्ले स्टोर पर डाउनलोड के लिए उपलब्ध है। इसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं को डिजिटल रूप से साक्षर बनाना और सुरक्षित इंटरनेट उपयोग के प्रति जागरूक करना है। भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) ने इस महत्वपूर्ण पहल के लिए लखनऊ विश्वविद्यालय और ट्रिपल आईटी उना को संयुक्त जिम्मेदारी सौंपी है।
लखनऊ विश्वविद्यालय और ट्रिपल आईटी उना की संयुक्त पहल
इस प्रोजेक्ट के लिए 13 लाख रुपये का बजट आवंटित किया गया है। लखनऊ विश्वविद्यालय की प्रोफेसर रोली मिश्रा और ट्रिपल आईटी उना की डॉ. निष्ठा हूडा इस पर काम कर रही हैं। ट्रिपल आईटी उना ने ही इस सुरक्षा एप को तकनीकी रूप से विकसित किया है। यह एप उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों में महिलाओं के बीच सुरक्षा की नई चेतना पैदा करेगा। संस्थान जल्द ही जमीनी स्तर पर इसका प्रशिक्षण शुरू करेंगे।
यूपीआई और सोशल मीडिया स्कैम से बचाव की जानकारी
‘स्त्री सक्षम’ एप में सुरक्षा के कई महत्वपूर्ण पहलू शामिल किए गए हैं। यह महिलाओं को यूपीआई पेमेंट फ्रॉड, सोशल मीडिया स्कैम और फर्जी लिंक की पहचान करना सिखाता है। एप में पासवर्ड सुरक्षा और एआई जनित फर्जी कंटेंट से बचने के उपाय भी दिए गए हैं। इसके साथ ही, यदि कोई महिला फ्रॉड का शिकार हो जाती है, तो उसे तत्काल सहायता के लिए संपर्क विवरण भी उपलब्ध कराए गए हैं। यह एक वन-स्टॉप सुरक्षा समाधान है।
यूपी और हिमाचल के छह जिलों में होगा विशेष सर्वे
परियोजना के तहत शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं का डिजिटल साक्षरता परीक्षण भी होगा। इसके लिए 18 से 60 वर्ष की महिलाओं के बीच एक विस्तृत प्रश्नावली आधारित सर्वे किया जाएगा। हिमाचल के उना, हमीरपुर, शिमला और उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर एवं नोएडा को इस सर्वे के लिए चुना गया है। विशेषज्ञ यह जानने का प्रयास करेंगे कि महिलाएं डिजिटल खतरों को लेकर कितनी सतर्क हैं। इस पूरी प्रक्रिया को जून तक पूरा करने का लक्ष्य है।
डिजिटल साक्षरता और महिला सुरक्षा पर विशेष जोर
प्रोफेसर रोली मिश्रा के अनुसार, यह एप सुरक्षित डिजिटल वातावरण बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। महिलाएं अक्सर तकनीकी जानकारी के अभाव में साइबर अपराधियों का आसान निशाना बन जाती हैं। ‘स्त्री सक्षम’ उन्हें इन खतरों के प्रति सचेत कर आत्मनिर्भर बनाएगा। इस मोबाइल एप के माध्यम से सरकारी तंत्र सीधे तौर पर महिलाओं तक सुरक्षा सुझाव पहुंचा सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे साइबर अपराधों की दर में उल्लेखनीय कमी आएगी।


