हिमाचल प्रदेश में राष्ट्रीय लोक अदालत 9 मई को, 63 हजार लंबित मामलों के निपटारे का लक्ष्य

Himachal News: हिमाचल प्रदेश में आगामी 9 मई को वर्ष की दूसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। यह महत्वपूर्ण आयोजन प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया के संरक्षण में हो रहा है। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर इस पूरी प्रक्रिया का मार्गदर्शन कर रहे हैं। राज्य के सभी न्यायालयों में एक साथ आयोजित होने वाली इस लोक अदालत का उद्देश्य लंबित कानूनी विवादों का त्वरित और आपसी सहमति से समाधान निकालना है।

ट्रैफिक चालान और मोटर वाहन मामलों का होगा त्वरित समाधान

इस लोक अदालत में विशेष रूप से ट्रैफिक मजिस्ट्रेट के पास लंबित मोटर वाहन चालान और संबंधित मामलों पर ध्यान दिया जाएगा। प्रशासन ने वादियों की सुविधा के लिए कंपाउंडिंग शुल्क या जुर्माने के भुगतान हेतु ‘ई-पे’ (e-Pay) के माध्यम से ऑनलाइन भुगतान की सुविधा भी प्रदान की है। इस डिजिटल पहल से लोगों को अदालतों के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी और समय की बचत होगी। छोटे अपराधों और चालान से जुड़े मामलों को मौके पर ही सुलझाया जाएगा।

63,000 मामलों की पहचान, बैंकों और बीमा कंपनियों के साथ बैठकें

विधिक सेवा प्राधिकरण ने इस बार की राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए लगभग 63,000 विभिन्न मामलों की पहचान की है। इन मामलों के प्रभावी निपटारे के लिए सभी बार एसोसिएशनों, बीमा कंपनियों और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ नियमित बैठकें की जा रही हैं। वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधियों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया गया है ताकि ऋण संबंधी विवादों का समाधान आसानी से हो सके। प्राधिकरण का प्रयास है कि अधिक से अधिक लोग इस अवसर का लाभ उठा सकें।

जन-जागरूकता अभियान में एनजीओ और स्थानीय निकायों की भागीदारी

राष्ट्रीय लोक अदालत की सफलता के लिए प्रशासन बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चला रहा है। आईईसी (IEC) सामग्री के माध्यम से आम जनता और वादियों को उनके अधिकारों और लोक अदालत के फायदों के बारे में बताया जा रहा है। इस अभियान में स्थानीय निकायों, गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), पंचायती राज संस्थाओं और पैरा लीगल स्वयंसेवकों की मदद ली जा रही है। सार्वजनिक परिवहन सेवाओं के माध्यम से भी इस आयोजन की जानकारी दूर-दराज के क्षेत्रों तक पहुंचाई जा रही है।

न्यायिक प्रणाली का बोझ कम करने की प्रभावी पहल

विशेषज्ञों के अनुसार, लोक अदालतें भारतीय न्यायिक प्रणाली पर बढ़ते बोझ को कम करने का एक सशक्त माध्यम हैं। इसमें सुलझाए गए मामलों की कोई अपील नहीं होती, जिससे विवाद हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है। हिमाचल प्रदेश में इस आयोजन से न केवल हजारों लोगों को न्याय मिलेगा, बल्कि अदालतों में लंबित फाइलों की संख्या भी कम होगी। प्राधिकरण ने सभी पक्षों से अपील की है कि वे आपसी सहमति से विवाद खत्म करने के इस मंच का उपयोग जरूर करें।

Hot this week

Related News

Popular Categories