New Delhi News: मोदी कैबिनेट ने मंगलवार को कृषि और तकनीक के क्षेत्र में कई ऐतिहासिक फैसलों को मंजूरी दी है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सरकार ने ‘कपास क्रांति’ के माध्यम से देश के 32 लाख किसानों को सशक्त बनाने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही गन्ना किसानों के लिए उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) बढ़ाकर 365 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। इन फैसलों का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और भारत को कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है।
कपास क्रांति के लिए 5,669 करोड़ रुपये का बजट
भारत वर्तमान में 297 लाख बेल्स के साथ दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कपास उत्पादक है। 2030-31 तक इसकी मांग बढ़कर 450 बेल्स होने की उम्मीद है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कैबिनेट ने 5,669 करोड़ रुपये के ‘कपास क्रांति’ प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। यह पहल आधुनिक फाइबर, उन्नत उत्पादन तकनीक और अनुसंधान पर केंद्रित होगी। सरकार चाहती है कि कपास उगाने वाले किसान नई तकनीक अपनाकर अपनी पैदावार में वैश्विक स्तर पर सुधार करें।
गन्ना किसानों को मिलेगा 1 लाख करोड़ रुपये का लाभ
कैबिनेट ने गन्ने के नए सीजन के लिए एफआरपी (FRP) में बड़ी बढ़ोतरी की है। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि 365 रुपये प्रति क्विंटल का भाव उत्पादन लागत से लगभग 200% अधिक है। इस फैसले से देशभर के गन्ना किसानों को कुल मिलाकर लगभग एक लाख करोड़ रुपये का भुगतान मिलेगा। यह दर 10.25% की रिकवरी दर पर आधारित है। सरकार का दावा है कि यह कदम किसानों के जीवन स्तर को सुधारने में संजीवनी साबित होगा।
इमरजेंसी क्रेडिट और सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स पर मुहर
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को देखते हुए सरकार ने एक जरूरी ‘इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम’ शुरू की है। इसके अलावा, गुजरात के वडिनार में 18,000 करोड़ रुपये की शिप रिपेयर फैसिलिटी को मंजूरी मिली है। तकनीकी क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने के लिए 1,570 करोड़ रुपये के दो नए सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स को भी हरी झंडी दी गई है। इन परियोजनाओं से देश में बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
1.52 लाख करोड़ रुपये के कुल बजटीय प्रावधान
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि कैबिनेट की बैठक में कुल 10 बड़े फैसले लिए गए हैं, जिनकी कुल लागत लगभग 1,52,000 करोड़ रुपये है। इसमें किसानों के कल्याण से लेकर ज्यूडिशियरी और बुनियादी ढांचे के विकास तक के महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। सरकार का मुख्य फोकस देश की जीडीपी में कृषि और विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़ाना है। इन निवेशों से आने वाले वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर एक नई मजबूती और गति प्राप्त होगी।


