पोक्सो मामला: भाजपा विधायक हंसराज की बढ़ी मुश्किलें, हाई कोर्ट ने जमानत के खिलाफ याचिका पर मांगा जवाब

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के चुराह से भाजपा विधायक डॉ. हंसराज की कानूनी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। प्रदेश हाई कोर्ट ने पोक्सो (POCSO) एक्ट के तहत दर्ज मामले में विधायक को मिली जमानत के खिलाफ दायर याचिका पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने विधायक को दो दिन के भीतर अपना पक्ष रखने के आदेश दिए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई अब 12 मई के लिए टाल दी गई है। राज्य सरकार ने पहले ही इस मामले में अपना जवाब दाखिल कर दिया है।

चम्बा कोर्ट के जमानत फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती

न्यायाधीश संदीप शर्मा की एकल पीठ के समक्ष इस संवेदनशील मामले की सुनवाई हुई। पीड़िता ने चम्बा की निचली अदालत द्वारा विधायक को दी गई जमानत को हाई कोर्ट में चुनौती दी है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विधायक हंसराज और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया था। पीड़िता का तर्क है कि मामले की जांच प्रभावित हो सकती है। अब हाई कोर्ट यह तय करेगा कि विधायक की जमानत बरकरार रहेगी या इसे रद्द कर दिया जाएगा।

फेसबुक लाइव के जरिए सामने आया था यौन शोषण का मामला

विवाद की शुरुआत 7 नवंबर 2025 को हुई थी। एक युवती ने फेसबुक लाइव के जरिए विधायक डॉ. हंसराज पर गंभीर आरोप लगाए थे। पीड़िता ने आरोप लगाया कि नाबालिग रहने के दौरान विधायक ने उसे बहला-फुसलाकर उसका यौन शोषण किया था। लाइव वीडियो वायरल होने के तुरंत बाद महिला थाना चम्बा में पोक्सो अधिनियम और अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। विधायक ने गिरफ्तारी से बचने के लिए 10 नवंबर को अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी।

अदालत में राज्य सरकार और बचाव पक्ष की दलीलें

हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से विस्तृत जवाब पेश किया गया। सरकार ने मामले के तथ्यों और अब तक की पुलिस जांच का विवरण अदालत के सामने रखा है। दूसरी ओर, विधायक को अब दो दिन के भीतर अपनी सफाई और पीड़िता के आरोपों का जवाब देना होगा। पीड़िता के वकील का कहना है कि आरोपी एक प्रभावशाली पद पर है, जिससे न्याय प्रक्रिया बाधित हो सकती है। अदालत अब सभी पक्षों के जवाबों का कानूनी मूल्यांकन करेगी।

चुराह में राजनीतिक और सामाजिक सरगर्मी तेज

इस कानूनी लड़ाई के चलते चुराह और चम्बा जिले की राजनीति में भारी हलचल है। भाजपा विधायक पर लगे इन आरोपों ने विपक्षी दलों को भी हमलावर होने का मौका दे दिया है। सामाजिक संगठन भी मामले की निष्पक्ष जांच और पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, विधायक के खिलाफ साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया जारी है। अब सबकी नजरें 12 मई को होने वाली हाई कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जो विधायक का भविष्य तय करेगी।

Hot this week

Related News

Popular Categories