Himachal News: हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर के विधायी कौशल पर संसद ने एक बार फिर भरोसा जताया है। उन्हें वर्ष 2026-27 के कार्यकाल के लिए संसद की प्रतिष्ठित लोक लेखा समिति (PAC) का सदस्य चुना गया है। यह उनकी लगातार तीसरी नियुक्ति है, जो उनके बढ़ते संसदीय कद और विशेषज्ञता को साबित करती है। इससे पहले वे 2024-25 और 2025-26 में भी इस महत्वपूर्ण समिति के सक्रिय सदस्य रहे हैं। पीएसी में उनकी मौजूदगी हमीरपुर के लिए गौरव की बात है।
क्या है लोक लेखा समिति और इसकी असली ताकत?
संसद की लोक लेखा समिति केंद्र सरकार के खर्चों की जवाबदेही तय करने वाला सबसे शक्तिशाली मंच है। इस समिति में कुल 22 सदस्य शामिल होते हैं, जिसका नेतृत्व वर्तमान में कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल कर रहे हैं। पीएसी का प्राथमिक कार्य नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्टों का गहन विश्लेषण करना है। यह समिति सुनिश्चित करती है कि जनता के टैक्स का पैसा केवल कानून सम्मत और पारदर्शी तरीके से ही खर्च हो। वित्तीय अनियमितताओं को रोकना इसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
राष्ट्रीय पटल पर हमीरपुर की आवाज हुई और अधिक मुखर
पीएसी जैसी सर्वोच्च विधायी निगरानी समिति में अनुराग ठाकुर की निरंतर मौजूदगी दिल्ली के गलियारों में उनके प्रभाव को दर्शाती है। संसदीय कार्यों और नीतिगत चर्चाओं में उनकी सक्रिय भागीदारी ने उन्हें देश के परिपक्व सांसदों की श्रेणी में खड़ा किया है। इस नियुक्ति से न केवल राष्ट्रीय स्तर पर उनके अनुभव को मान्यता मिली है, बल्कि हमीरपुर संसदीय क्षेत्र की समस्याओं और मांगों को राष्ट्रीय मंच पर उठाने के लिए एक मजबूत आधार भी मिला है।
अनुराग ठाकुर की विशेषज्ञता और विधायी अनुभव का लाभ
अनुराग ठाकुर का विधायी अनुभव उन्हें जटिल वित्तीय मामलों को समझने और उन पर तार्किक बहस करने में सक्षम बनाता है। सरकारी धन की फिजूलखर्ची पर अंकुश लगाने के लिए समिति उनके सुझावों को काफी गंभीरता से लेती है। लगातार तीसरी बार निर्वाचित होना इस बात का प्रमाण है कि सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ही उनके संसदीय कौशल का सम्मान करते हैं। हमीरपुर के विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर उनकी स्पष्ट समझ क्षेत्र के निवासियों के लिए लाभकारी सिद्ध होगी।


